देश विदेशबड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़

स्टारलिंक के खिलाफ स्वदेशी जागरण मंच का प्रदर्शन, पीएम मोदी से भारत में संचालन की अनुमति नहीं देने की मांग

राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक के विकास को बताया प्राथमिकता, एलन मस्क के रुख पर संगठन ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर भारत में बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि स्टारलिंक को भारत में संचालन की अनुमति नहीं दी जाए। संगठन का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट जैसी महत्वपूर्ण संचार तकनीक के मामले में व्यावसायिक हितों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संरक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्वदेशी जागरण मंच के सदस्यों और समर्थकों ने स्टारलिंक के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर संगठन ने अपनी चिंताओं से अवगत कराया और मांग की कि कंपनी को अनुमति देने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए।

एलन मस्क के बयानों पर जताई नाराजगी

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने ज्ञापन में एलन मस्क के रुख पर सवाल उठाए। महाजन के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कुछ मुद्दों पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगे गए थे, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक, इन सवालों का जवाब देने के बजाय सार्वजनिक बयानों के माध्यम से भारतीय कारोबारियों और सरकार को लेकर टिप्पणियां की गईं।

महाजन ने आशंका जताई कि स्टारलिंक आवश्यक सुरक्षा शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी सरकार पर सार्वजनिक दबाव बनाकर लाइसेंस हासिल करने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, ये स्वदेशी जागरण मंच की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त की गई आशंकाएं हैं। उपलब्ध जानकारी में कंपनी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के संचालन की अनुमति देने का निर्णय केवल तकनीकी प्रगति और व्यावसायिक संभावनाओं के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके लिए संचार नेटवर्क पर नियामकीय निगरानी, डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे पहलुओं का आकलन आवश्यक है।

संगठन के अनुसार, किसी भी विदेशी कंपनी को भारतीय बाजार में सेवाएं देने से पहले निर्धारित नियमों और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन करना चाहिए। यदि कंपनी से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है, तो अनुमति देने से पहले उनका संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट ढांचा विकसित करने पर जोर

स्वदेशी जागरण मंच ने भारत में स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। संगठन का तर्क है कि संचार व्यवस्था देश के रणनीतिक हितों से जुड़ी है और इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू तकनीकी क्षमताओं का विकास जरूरी है।

सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक दूरदराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, इस तकनीक के विस्तार के साथ नेटवर्क संचालन, डेटा सुरक्षा और नियामकीय निगरानी से जुड़े सवालों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

संगठन का मानना है कि भारत को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप संचार तकनीक विकसित करने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

स्टारलिंक की सेवाओं पर सरकार के रुख का इंतजार

स्टारलिंक स्पेसएक्स की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा है, जिसका उद्देश्य उपग्रहों के नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस तकनीक से उन क्षेत्रों में भी इंटरनेट पहुंचाने की संभावनाएं बनती हैं, जहां पारंपरिक नेटवर्क की पहुंच सीमित है।

एक ओर सैटेलाइट इंटरनेट को डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके संचालन में राष्ट्रीय सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल, स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री से स्टारलिंक को भारत में संचालन की अनुमति नहीं देने की मांग की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मांग पर सरकार के अंतिम निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया का विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में आगे का फैसला संबंधित नियामकीय प्रक्रियाओं, सुरक्षा आकलन और सरकारी निर्णय पर निर्भर करेगा।

Author

Related Articles

Back to top button