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टीएचडीसी अमिलिया कोल माइंस के मुख्य द्वार पर विस्थापितों का धरना जारी, 270 परिवारों को लाभ नहीं मिलने का आरोप

 

सिंगरौली। जिले की टीएचडीसी अमिलिया कोल माइंस परियोजना में विस्थापितों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। अपनी मांगों को लेकर विस्थापितों ने कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। विस्थापितों ने कंपनी प्रबंधन पर बार-बार आश्वासन देने के बावजूद वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं, कंपनी के प्रतिनिधियों ने मामले में कोई बयान देने से परहेज किया।

विस्थापितों का कहना है कि वर्ष 2017 से कंपनी द्वारा कोयला उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। इस दौरान कई परिवारों की जमीन अधिग्रहित की गई और मकान भी गिरा दिए गए, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक विस्थापन से संबंधित सभी लाभ नहीं मिल सके हैं। तेंदुआ ग्राम पंचायत के सरपंच छोटेलाल मरावी के अनुसार, करीब 270 लोगों को अब तक विस्थापन का पूरा लाभ नहीं मिला है। इस समस्या को लेकर कंपनी प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

मकान गिराने के बाद भी नहीं मिली मुआवजे की राशि

प्रदर्शन कर रहे प्रभावितों ने बताया कि उनकी एक एकड़ जमीन और कच्चा खपरैल मकान लिया गया था। जमीन का मुआवजा तो मिल गया, लेकिन मकान के बदले मिलने वाली 3 लाख 69 हजार रुपये की राशि अब तक नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि करीब 6 महीने पहले ही मकान गिरवा दिया गया था। इसके बाद से वे मुआवजे के लिए कंपनी प्रबंधन के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का निराकरण नहीं हुआ।

95 वर्षीय बुजुर्ग महिला का नाम सूची से गायब

प्रदर्शन में शामिल 95 वर्षीय रजवंती देवी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनकी 85 एकड़ जमीन और मकान चले गए, लेकिन कंपनी प्रबंधन की ओर से जारी विस्थापितों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं है। उनका आरोप है कि सूची में नाम नहीं होने के कारण उन्हें विस्थापन का लाभ नहीं मिल पाया और न ही जमीन उपलब्ध कराई गई। बुजुर्ग महिला का कहना है कि जमीन और मकान छिन जाने के बाद भी उन्हें अपने हक के लिए भटकना पड़ रहा है।

अधिकारियों के सामने आश्वासन, फिर भी समाधान नहीं

विस्थापितों का आरोप है कि जब भी उनकी समस्याओं को लेकर अधिकारियों की मौजूदगी में बातचीत होती है, तब कंपनी की ओर से मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। इसी वजह से प्रभावित परिवारों ने अब मुख्य द्वार पर धरना देकर अपनी आवाज बुलंद की है। विस्थापितों ने मांग की है कि लंबित मुआवजे का भुगतान किया जाए, पात्र परिवारों को विस्थापन का पूरा लाभ दिया जाए और सूची से छूटे लोगों के मामलों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।

सवालों पर कंपनी प्रतिनिधियों ने साधी चुप्पी

विस्थापितों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में जब कंपनी के प्रतिनिधियों से सवाल किए गए तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और बयान देने से बचते नजर आए। ऐसे में विस्थापितों की शिकायतों पर कंपनी प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका है। अब देखना होगा कि प्रबंधन प्रभावित परिवारों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और धरना समाप्त कराने के लिए कोई ठोस पहल करता है या नहीं।

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