100 बेड अस्पताल के लिए गन्नई को चुनने की उठी मांग
सरई के दूरस्थ अंचलों की उपेक्षा पर ग्रामीणों का सवाल, विधायक से हस्तक्षेप की गुहार

सिंगरौली:विकास योजनाओं के केंद्रीकरण को लेकर सरई अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं। सरई क्षेत्र के लिए स्वीकृत 100 बिस्तरों वाले नए अस्पताल को लेकर मांग उठी है कि इसे सरई मुख्य बाजार के बजाय गन्नई क्षेत्र में स्थापित किया जाए, ताकि ओवरी, पुरैल और आसपास की दर्जनभर से अधिक उपेक्षित ग्राम पंचायतों के लाखों ग्रामीणों को सुलभ चिकित्सा सुविधा मिल सके।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में एक सामान्य ग्राम पंचायत रही सरई आज थाना, तहसील, मजिस्ट्रेट कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), सामुदायिक भवन, आईटीआई, कॉलेज, नगर परिषद और रेंजर ऑफिस जैसी तमाम सुविधाओं का केंद्र बन चुकी है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा मंडल सरई के अंतर्गत आने वाली बड़ी आबादी वाली पंचायतें—जैसे ओवरी, पुरैल, कठदहा, पोखरी टोला, गोड़बहरा, बकहुल, पेड़ा और बरका—दशकों बाद भी बुनियादी विकास और बड़े संस्थानों से वंचित हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गन्नई पंचायत इन सभी उपेक्षित ग्राम पंचायतों के केंद्र में स्थित है, जहां अकेले करीब 5,000 मतदाता निवास करते हैं। यदि स्वीकृत 100 बेड का अस्पताल गन्नई क्षेत्र में बनता है, तो 10 से 15 बड़ी पंचायतों के गरीब, मजदूर और आदिवासी परिवारों को सामान्य व आपातकालीन उपचार के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर सरई नहीं जाना पड़ेगा। इससे सरई मुख्य बाजार के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण अंचलों का भी संतुलित विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने देवसर विधायक एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष सरई रामधनी यादव से मांग की है कि वे जनहित और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 100 बेड के अस्पताल को गन्नई में स्थापित कराने की ठोस पहल करें। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा तभी साकार होगी जब विकास की किरणें केवल मुख्य मुख्यालयों तक सीमित न रहकर दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी।













