टीएचडीसी और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश, 8वें दिन भी धरना जारी

सिंगरौली। जिले में संचालित टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पीड़रवाह स्थित टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड कंपनी के मुख्य गेट पर ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन 8वें दिन भी जारी रहा। वहीं, गहिलरा ग्राम पंचायत के सरपंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कंपनी के वाहनों को रोककर चक्काजाम किया और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनियां उनके गांवों के आसपास कोयला खनन गतिविधियां संचालित कर रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार देने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में लगातार अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों से उनकी आजीविका जुड़ी रही है। तेंदूपत्ता, महुआ और डोरी जैसी वन उपज से परिवारों का भरण-पोषण होता था, लेकिन खनन गतिविधियां बढ़ने के बावजूद स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार का लाभ नहीं मिल रहा है।
विस्थापितों के नेता जनक लाल सोनी ने कहा कि कंपनी के आसपास बसे गांवों के लोगों को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़क, नाली, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं को भी उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र की सड़कें खराब हो चुकी हैं, नालियों की स्थिति ठीक नहीं है, बिजली की आपूर्ति अनियमित है और पेयजल संकट से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी प्रबंधन के समक्ष कई बार मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शन की सूचना पर कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक कंपनी के वाहनों को क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया जाएगा। गहिलरा के सरपंच ने भी कंपनी पर खनन गतिविधियों पर ध्यान देने और ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर समस्याओं का शीघ्र निराकरण कराने की मांग की है।











