उतर प्रदेशक्राइम न्यूज़बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़

रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी मानसिक रूप से बीमार बेटी को नौकर दंपती ने सालों तक कैद में रखा, पुलिस जांच में जुटी

महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी मानसिक रूप से बीमार बेटी को उनके ही नौकर दंपती द्वारा कई वर्षों तक कैद में रखने का आरोप लगा है। यह मामला तब उजागर हुआ, जब बुजुर्ग ओमप्रकाश सिंह राठौर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई और उनके घर से मिली उनकी बेटी रश्मि की हालत ने सभी को झकझोर दिया। पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है।

घटना महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र की हिंद टायर गली स्थित ओमप्रकाश सिंह के घर की है। ओमप्रकाश सिंह (70) अपनी 27 वर्षीय मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी रश्मि के साथ रहते थे। उनकी पत्नी का निधन 2016 में हो चुका था। घर के कामों के लिए ओमप्रकाश ने चरखारी निवासी रामप्रकाश कुशवाहा और उसकी पत्नी रामदेवी को नौकर रखा था। आरोप है कि नौकर दंपती ने धीरे-धीरे घर पर कब्जा कर लिया और पिता-पुत्री को घर के नीचे वाले कमरे में बंद कर दिया। जब भी कोई परिजन मिलने आता, तो नौकर दंपती उन्हें यह कहकर लौटा देता कि वे किसी से मिलना नहीं चाहते थे।

ओमप्रकाश की संदिग्ध मौत ने मामले को उजागर किया

29 दिसंबर को ओमप्रकाश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जब परिजन घर पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। ओमप्रकाश का शरीर अत्यधिक कुपोषण के कारण पूरी तरह सूख चुका था, जबकि उनकी बेटी रश्मि एक अंधेरे कमरे में नग्न और असहाय हालत में पाई गई। रश्मि का शरीर कंकाल जैसा दिख रहा था, और वह महीनों से भूखी-प्यासी लग रही थी। परिजनों ने उसे तुरंत अपने साथ ले जाकर इलाज शुरू कर दिया।

नौकर दंपती का संपत्ति कब्जाने का आरोप

ओमप्रकाश के भाई अमर सिंह का आरोप है कि नौकर दंपती ने यह पूरी घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी। उनका संदेह है कि दंपती ने मकान और बैंक बैलेंस हड़पने के लिए ओमप्रकाश और उनकी बेटी को कैद कर लिया, उन्हें खाना नहीं दिया और इलाज से भी वंचित रखा। अमर सिंह के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से नौकर दंपती ने मिलने से मना कर दिया था, लेकिन परिजनों को यह भरोसा दिलाया गया कि ओमप्रकाश स्वेच्छा से किसी से नहीं मिलना चाहते थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि नौकर दंपती ऊपर के कमरों में आराम से रहते थे, जबकि ओमप्रकाश और रश्मि को नीचे बंद कर दिया गया था। कई बार आसपास के लोगों ने उनकी स्थिति जानने की कोशिश की, लेकिन नौकर ने उन्हें बहलाकर वापस भेज दिया।

पुलिस जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने ओमप्रकाश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इतने लंबे समय तक किसी को कैद में रखना सामान्य परिस्थिति में संभव नहीं लगता, इसलिए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

परिजनों ने यह सवाल भी उठाया है कि जब ओमप्रकाश और उनकी बेटी को वर्षों तक मिलने नहीं दिया गया, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की। हालांकि, परिवार का कहना है कि नौकर दंपती उनकी मानसिक स्थिति का हवाला देकर उन्हें हर बार भ्रमित करता था।

समाज में अमानवीयता का पर्दाफाश

यह घटना महोबा के स्थानीय समाज के लिए भी एक बड़ा झटका है। किसी प्रतिष्ठित रेलवे कर्मचारी और उनकी मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी के साथ इस तरह की अमानवीय घटना होने से स्थानीय लोग भी हैरान हैं। प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया है।

Author

Related Articles

Back to top button