बलिया नदी बनी ग्रामीणों के लिए संकट, प्रदूषित पानी से बढ़ रही विकलांगता और बीमारियां

सिंगरौली। कोयला और बिजली उत्पादन के लिए देशभर में चर्चित सिंगरौली क्षेत्र अब प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सिंगरौली–सोनभद्र सीमा पर बहने वाली बलिया नदी, जो कभी ग्रामीणों की पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों की प्रमुख स्रोत थी, अब अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी है। नदी में कोयला खदानों से निकलने वाला अवशिष्ट पदार्थ और रसायन वर्षों से बहाए जाने के कारण पानी काला हो गया है तथा गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के दूषित पानी के कारण कई लोगों में विकलांगता, दांतों का पीला होना और फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हर्रहवां गांव के सरकारी शिक्षक डॉ. सुरेंद्र तिवारी के अनुसार, यहां के बच्चों के दांतों का पीला पड़ना और हड्डियों का कमजोर होना आम समस्या बन चुकी है। पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा बीमारी को और बढ़ा रही है।
स्थल निरीक्षण में पाया गया कि नदी का पानी पूरी तरह से काला है और उसमें कोयला एवं रासायनिक तत्वों की मोटी परत जमी हुई है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि इस जहरीले पानी से मवेशियों की भी मौत हो रही है।सोनभद्र क्षेत्र के गांवों में भी स्थिति चिंताजनक है। कचनारवा पंचायत के शिकारी टोली गांव में कई परिवारों के सदस्य विकलांगता से पीड़ित हैं। 35 वर्षीय राजू उरांव सहित उनके परिवार के अन्य सदस्य भी बीमारी से प्रभावित हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नृपेंद्र सागर के अनुसार, क्षेत्र में मलेरिया, टायफाइड, त्वचा संबंधी रोग और फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका मुख्य कारण दूषित पानी और प्रदूषित वातावरण है।इस मामले में सिंगरौली कलेक्टर गौरव ने बताया कि स्थिति संज्ञान में ली गई है। उन्होंने जल विभाग को नदी के पानी के नमूने एकत्रित कर जांच कराने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों को आशा है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप से जल्द ही स्वच्छ पानी की व्यवस्था हो पाएगी और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।













