सोनिया गांधी को कोर्ट का नोटिस: नागरिकता से पहले मतदाता बनने का आरोप, 6 जनवरी को अगली सुनवाई

नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी एक बार फिर कानूनी विवाद में घिर गई हैं। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने उन्हें वोटर लिस्ट विवाद के मामले में नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस पुनरीक्षण याचिका पर जारी किया गया है जिसमें दावा किया गया है कि सोनिया गांधी वर्ष 1980 में भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना ही मतदाता सूची में शामिल हो गई थीं।याचिका अधिवक्ता और राउज़ एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास त्रिपाठी ने दायर की है। उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सितंबर 2025 में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की उनकी मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि मामला दर्ज करने का आधार पर्याप्त नहीं है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 1980 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम मौजूद था, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली। त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं, तब उनके नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कैसे किया गया।
याचिका में यह भी उल्लेख है कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जो इस बात का संकेत है कि संबंधित प्राधिकरणों को उस समय गड़बड़ी का संज्ञान हुआ था। याचिकाकर्ता ने यह भी पूछा है कि 1980 में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए कौन से दस्तावेज़ों का उपयोग किया गया और क्या किसी फर्जी प्रमाण का सहारा लिया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले की गहन जांच आवश्यक है और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज न करने का निर्णय त्रुटिपूर्ण था। अब सेशंस कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।













