इंडिगो पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई: रोजाना 110 फ्लाइट्स कम, केंद्र की सख्त चेतावनी-लापरवाही साबित हुई तो जेल तय

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर फ्लाइट संकट के बीच बड़ा एक्शन लिया गया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो को तत्काल प्रभाव से 5% उड़ानें कम करने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि प्रतिदिन उड़ने वाली इंडिगो की लगभग 110 फ्लाइट्स अब रद्द रहेंगी या उनके स्लॉट अन्य एयरलाइंस को दिए जाएंगे। यह कदम 2 दिसंबर से चल रही लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और यात्रियों की बढ़ती परेशानियों के बाद उठाया गया है।
DGCA ने क्यों उठाया कठोर कदम?
DGCA ने पाया कि इंडिगो नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों, भारी क्रू कमी और परिचालन अव्यवस्था के चलते सुचारू उड़ान संचालन में नाकाम साबित हुई है। इससे कई हवाई अड्डों पर अफरातफरी का माहौल बन गया और लाखों यात्री फंस गए। नियामक का कहना है कि जब तक एयरलाइन पर्याप्त क्रू और स्थिर ऑपरेशन प्लान तैयार नहीं करती, तब तक उसे कम क्षमता पर ही काम करना होगा।सूत्रों के मुताबिक, कम की जाने वाली उड़ानों की सूची तैयार की जा रही है। इंडिगो के खाली हुए स्लॉट एयर इंडिया, अकासा एयर, स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस को दिए जाने की संभावना है, ताकि एयरपोर्ट्स पर भीड़ कम हो सके।
हवाई किराए पर भी नियंत्रण
सरकार ने इस संकट के दौरान यात्रियों से मनमाने किराए वसूलने पर सख्ती दिखाई है। हवाई किरायों पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि कंपनियां हालात का फायदा उठाकर कीमतें न बढ़ा सकें।इंडिगो ने अपनी सफाई में खराब मौसम, तकनीकी दिक्कतों और नए नियमों का हवाला दिया है। हालांकि DGCA ने एयरलाइन के रोस्टर और स्टाफिंग की जांच के लिए 4 सदस्यीय विशेष टीम गठित कर दी है।
केंद्रीय मंत्री की चेतावनी—गलती साबित हुई तो जेल
संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सख्त बयान देते हुए कहा“यदि लापरवाही साबित होती है, तो इंडिगो के जिम्मेदार अधिकारियों को 3 साल की जेल, 1 करोड़ रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।”सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए कहा है कि अब तक 5,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने से 6 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।सरकार और अदालत दोनों की नजरें अब इंडिगो की रिपोर्ट और DGCA की जांच पर टिकी हैं।













