यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों की महापंचायत, 14 जनवरी तक समाधान नहीं हुआ तो लखनऊ कूच

नई दिल्ली। जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से नाराज किसानों का गुस्सा सोमवार को यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पर आयोजित महापंचायत में खुलकर सामने आया। भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर हुई इस पंचायत में छह जिलों के हजारों किसान शामिल हुए और सरकार व प्रशासन को साफ संदेश दिया कि अब केवल वादों से काम नहीं चलेगा, ठोस फैसले चाहिए।
करीब पांच घंटे तक चली महापंचायत में गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा और आगरा जिले के किसान मौजूद रहे। किसानों का कहना था कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीन तो अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े अधिकार अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इसी वजह से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
महापंचायत में किसानों ने मांग की कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अधिग्रहित जमीन पर 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए और सर्किल रेट में बढ़ोतरी की जाए। इसके साथ ही 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने, आबादी निस्तारण और नोएडा एयरपोर्ट व औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन देने वाले किसानों के बच्चों को शिक्षा व योग्यता के अनुसार स्थायी रोजगार देने की मांग भी उठाई गई।
भाकियू नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी से पंचायत का माहौल और गर्म हो गया। टिकैत ने सरकार और प्राधिकरणों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को वर्षों से सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 14 जनवरी तक मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो किसान लखनऊ कूच करेंगे।
इसके अलावा राकेश टिकैत ने अरावली विवाद पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि अरावली देश की धरोहर है और इसे नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। अगर ऐसा करने की कोशिश हुई तो किसान आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर वहीं जाकर धरना देंगे।













