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झारखंड में हाथियों का आतंक: फसलों को नुकसान, रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित

 

हजारीबाग। झारखंड में सर्दी के मौसम के साथ ही जंगली हाथियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। जंगलों से भटककर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हाथियों के झुंड न सिर्फ ग्रामीणों के लिए खतरा बन रहे हैं, बल्कि रेल और सड़क यातायात को भी प्रभावित कर रहे हैं। कई जगह ट्रेनों को रोकना पड़ा है, वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी वाहनों की आवाजाही में रुकावटें पैदा हो रही हैं।

हाल ही में असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराने से आठ हाथियों की मौत हो गई थी, जिससे कई घंटे तक रेल सेवा ठप रही। इसी तरह झारखंड के चक्रधरपुर रेलवे डिवीजन में टाटानगर और ओडिशा की ओर जाने वाली कई ट्रेनों को तीन-तीन बार रोका गया, ताकि हाथियों को सुरक्षित पटरियों से हटाया जा सके।

ग्रामीण इलाकों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। मंगलवार देर रात हजारीबाग जिले के कंडेर पंचायत अंतर्गत कच्चूदाग गांव में हाथियों के एक झुंड ने खेतों में जमकर उत्पात मचाया। ग्रामीणों के अनुसार, रात करीब दो बजे पहाड़ों से उतरे हाथियों के झुंड में चार बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने गांव के मुहाने पर पहुंचकर आलू, सरसों सहित कई फसलों को रौंद डाला और बंद पड़े नव प्राथमिक विद्यालय के गेट को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

हाथियों के गांव में घुसने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा गया। पंचायत के मुखिया रविंद्र करमाली ने बताया कि कजरू बेदिया, सोरोवती देवी, लालू बेदिया, संतोष बेदिया, तिवारी बेदिया, महेश बेदिया और कामेश्वर बेदिया के खेतों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

गांव के पास पहाड़ों में हाथियों के मौजूद रहने से लोग रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। इससे पहले भी जिले के कई इलाकों में हाथियों के हमलों से जान-माल का नुकसान हो चुका है। वन विभाग लगातार हाथियों को सुरक्षित क्षेत्रों में भेजने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

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