‘इस्तीफा’ या रणनीति? जीएसटी डिप्टी कमिश्नर का त्यागपत्र बना पहेली

लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक उनका लिखित त्यागपत्र शासन या राज्य कर आयुक्त कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है। इससे पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जब तक विधिवत लिखित इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक उसे औपचारिक त्यागपत्र नहीं माना जा सकता। ऐसे में सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान फिलहाल केवल एक घोषणा भर माना जा रहा है। इसी बीच शासन ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
उल्लेखनीय है कि इस्तीफे की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उनके सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था। डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि इस संबंध में उन्होंने वर्ष 2021 में शिकायत दर्ज कराई थी और मेडिकल बोर्ड द्वारा बुलाए जाने के बावजूद प्रशांत कुमार सिंह जांच में उपस्थित नहीं हुए।
शासन ने इस मामले में अब तक की जांच, जारी नोटिस और संभावित विभागीय कार्रवाई की पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस्तीफे की घोषणा का संबंध चल रही जांच से तो नहीं है। प्रशांत कुमार सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि और हालिया गतिविधियों ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।













