स्पीच थेरेपी ने बदली हार्दिक की ज़िंदगी

सिंगरौली -जिला चिकित्सालय बैढ़न में स्पीच थेरेपी क्लिनिक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत संचालित हैं जिसमें पदस्थ ऑडिओलॉजिस्ट कम स्पीच थेरेपिस्ट श्री सम्बोधन सिंह द्वारा बच्चों को स्पीच थेरेपी दी जाती हैं। गोरबी निवासी हार्दिक पहले बोलने में असमर्थ था, लेकिन पिछले 2.4 साल से लगातार चल रही स्पीच थेरेपी से उसमे सुधार आया हैं बच्चे को मॉडरेट ऑटिजम स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लक्षण जन्म के कुछ साल बाद दिखने लगे थे, बच्चे के परिजन बच्चे को प्राथमिक उपचार के लिए बनारस और रीवा में शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर स्पीच थेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी करवाने की सलाह दी गयी। बनारस व रीवा में थेरेपी करवाना संभव नहीं था क्यूंकि इसका उपचार मे काफी समय लगता हैं।
बच्चे के परिजनो ने जिला चिकित्सालय में जाँच करवाई तब उन्हें जानकारी मिली की स्पीच थेरेपी की सुविधा यहाँ उपलब्ध हैं परिजन ने रोज बच्चे की थेरेपी करवाना शुरू किया।बच्चे को शुरुवाती कुछ दिनों में थेरेपी देने में बहुत दिक़्क़त होती थी, लेकिन धीरे धीरे उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा और एक जगह शांति से बैठ कर स्पीच थेरेपी लेने लगा।
उन्होने बताया कि उन्हे इस बीमारी की जानकारी नहीं थी इसीलिय उन्हें बच्चे को थेरेपी शुरू करवाने में 4 साल लग गए, अगर वो पहले ही “ऑटिज़्म” के लक्षणों को पहचान जाते तो उनका बच्चा और भी पहले बोलने लगता और उसका शैक्षणिक विकास समय पर होता । “ऑटिज़्म” एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, एक मस्तिष्क विकास विकार है जो सामाजिक मेलजोल, संचार और व्यवहार को प्रभावित करता है, हर व्यक्ति में यह अलग तरह से प्रकट होता है और शुरुआती पहचान व थेरेपी से काफी सुधार हो सकता है।
यह समस्या ज्यादातर एकल परिवार में ज़्यादा देखने को मिलती है, जिसमे बच्चे का वातावरण बहुत सीमित होता है और ये समस्या और भी जटिल हो जाती है अगर बच्चे को टीवी, मोबाइल फ़ोन ज़्यादा दिखाया जाता है । इसलिए बच्चे को 1 से 4 वर्ष तक (स्क्रीन टाइम) टीवी/ मोबाइल ना देवे, बच्चे को हर तरीक़े का वातावरण उपलब्ध कराये जिससे वो हर मामले में आत्मनिर्भर हो सके।













