रसोइयों को नहीं मिला 53 महीने का पारिश्रमिक, चितरंगी ब्लॉक में दम तोड़ता साझा चूल्हा कार्यक्रम

सिंगरौली। जिले के चितरंगी ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित साझा चूल्हा कार्यक्रम बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। रसोइयों को लंबे समय से मानदेय भुगतान नहीं मिलने से कार्यक्रम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आरोप है कि सितंबर 2025 से साझा चूल्हा के लिए सामग्री का भुगतान भी नहीं किया गया है और रसोइयों को नियमित पारिश्रमिक से वंचित रखा गया है।जानकारी के अनुसार, रसोइयों को पिछले 65 महीनों में केवल 6 हजार रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि नियमानुसार उन्हें प्रति माह 500 रुपये मानदेय दिया जाना तय है। इस हिसाब से करीब 53 महीनों का पारिश्रमिक अभी तक बकाया है। साझा चूल्हा कार्यक्रम से जुड़ी अधिकांश रसोइयां आर्थिक रूप से कमजोर और श्रमिक वर्ग की महिलाएं हैं, जिनके लिए यह राशि घर चलाने का सहारा थी।बताया जा रहा है कि रसोइयां लगातार पानी भरने, ईंधन जुटाने और भोजन पकाने जैसे कार्य कर रही हैं, लेकिन मेहनताना के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। भुगतान नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
अधिकारियों से लगाई गुहार
पीड़ित रसोइयों एवं स्व-सहायता समूहों ने अपनी समस्या परियोजना अधिकारी, डीपीओ और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। हर स्तर पर केवल आश्वासन ही मिला है, जबकि भुगतान की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है।सितंबर 2025 से साझा चूल्हा कार्यक्रम के तहत सामग्री का भुगतान भी स्व-सहायता समूहों को नहीं किया गया है, जिससे समूहों को उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव से समूहों और रसोइयों में असंतोष बढ़ रहा है।रसोइयों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो साझा चूल्हा कार्यक्रम पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच सकता है। साथ ही विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।











