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चितरंगी में कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में—जमीनी हकीकत से विभाग का कोई लेना-देना नहीं


- सिंगरौली/चितरंगी
- शिक्षा के नाम पर चल रहे खेल का ताज़ा उदाहरण चितरंगी संकुल केंद्र सुदा अंतर्गत शिक्षा गारंटी शाला सूदी में देखने को मिल रहा है।
- जहाँ अनियमितताओं पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। दो सप्ताह पहले कई मीडिया संस्थानों ने अतिथि शिक्षक नियुक्ति और मध्यान्ह भोजन में हो रही गड़बड़ियों को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन आज तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
- जिम्मेदार अधिकारी मीडिया की पूछताछ पर केवल “नोटिस जारी किया गया है” कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि जमीनी स्थिति बिल्कुल उलट है। बताया जा रहा है कि शाला के प्रधानाध्यापक की बहू अतिथि शिक्षक के रूप में पदस्थ है, जो सालों से स्कूल नहीं आती। उसकी जगह भाड़े का शिक्षक पढ़ा रहा है, लेकिन वेतन का भुगतान बहू के नाम से होता है। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला है।
- इधर मध्यान भोजन की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। समूह संचालक द्वारा छात्रों को गुणवत्ता विहीन भोजन—केवल चावल और दाल—परोसा जा रहा है। सब्जी और पोषण तत्वों का नाम तक नहीं, लेकिन बिल पूरे का पूरा बनाया जा रहा है। अधिकारी इस पूरे सोपान पर मौन साधे बैठे हैं।

- दरअसल, चितरंगी शिक्षा विभाग में अनियमितताएं कोई नई बात नहीं। पुस्तक घोटाला, साइकिल घोटाला जैसे मामले पहले ही विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर चुके हैं, और अब मध्यान भोजन में नया “सब्जी-दाल घोटाला” सामने आ गया है। यह पूरा तंत्र सिर्फ कमीशनखोरी का खेल बनकर रह गया है, जहाँ बच्चों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है।
- मीडिया के माध्यम से जिला दंडाधिकारी से अपेक्षा है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था को बचाया जा सके और बच्चों का हक सुरक्षित रह सके।
- श्री मान सिंह चंदेल विशेष रिपोर्टर सिंगरौली













