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जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पेयजल की जांच तेज

138 केंद्रों पर किया पेय जल के शुद्धता की जॉच

सिंगरौली/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर जल स्रोतों की जांच शुरू कर दी गई है।

अब तक 138 केंद्रों एवं स्कूलों में पानी के नमूनों की जांच पूरी की जा चुकी है। प्रदेशभर में चल रहे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत पीएचई विभाग द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती दी जा रही है। कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यात्रिकी ने बताया कि विभाग की तकनीकी टीम द्वारा अब तक 138 स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पेयजल स्रोतों की जांच की जा चुकी है। इसके तहत मौके पर जाकर पानी के नमूने लिए जा रहे हैं और उन्हें प्रयोगशालाओं में विभिन्न मानकों पर परखा जा रहा है।

उन्होने बताया कि पानी की जांच दो स्तरों पर की जा रही है। पहले चरण में फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से मैदानी स्तर पर पानी के रासायनिक तत्वों की प्रारंभिक जांच की जाती है। इसके बाद प्रयोगशाला परीक्षण में आयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस और बैक्टीरिया (ई-कोलाई) की विस्तृत जांच कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं।इस पहल से दूषित पानी से होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और हैजा के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।पीएचई विभाग ने आने वाले दिनों में शेष सभी शिक्षण संस्थानों और पोषण केंद्रों में जल स्रोतों की जांच पूरी करने का लक्ष्य रखा है, ताकि ‘सुरक्षित जल-स्वस्थ बचपन’ के संकल्प को साकार किया जा सके।

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