भोपाल: नारी वंदन अधिनियम पर सियासत तेज, मुख्यमंत्री का विपक्ष पर तीखा हमला

भोपाल, 19 अप्रैल 2026। नारी वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उनके रुख की तुलना महाभारत के कौरव पक्ष से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर अवसरवादी राजनीति कर रहा है।
20 अप्रैल को भाजपा की आक्रोश सभा
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस मुद्दे को जनता तक ले जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी राजधानी भोपाल में 20 अप्रैल को आक्रोश सभा और रैली आयोजित करेगी। इसके साथ ही पंचायत स्तर से लेकर नगर निगम परिषद तक निंदा प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी भी की जा रही है।
सरकार जल्द ही इस विषय पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है।
संयुक्त प्रेस वार्ता में विपक्ष पर निशाना
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के “मंदिर” में जो घटनाक्रम हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह द्रोपदी के चीरहरण की कथा सुनी जाती है, उसी तरह सदन में महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा उठाने के बजाय विपक्ष ने नकारात्मक भूमिका निभाई।
“मौकापरस्त है विपक्ष”
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि 2023 में जिस अधिनियम पर सर्वसम्मति बनी थी, अब उसी पर पलटी मार ली गई। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय समर्थन और बाद में विरोध करना राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है।
उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण भारत की पार्टी DMK पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चुनावी लाभ के लिए मुद्दों को भटका रही है और उसकी राजनीति “अलगाववादी मानसिकता” को दर्शाती है।
महिला नेतृत्व पर भी टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए विपक्ष की एक महिला नेता पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो खुद को महिला सशक्तिकरण की प्रतीक बताती हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर महिलाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डालने का काम किया है।
जनसंख्या के अनुपात में सीट बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1971 में देश की आबादी 55 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 140 करोड़ हो चुकी है। ऐसे में जनसंख्या के अनुपात में संसदीय सीटों का पुनर्विन्यास आवश्यक है, जिसे विपक्ष समझना नहीं चाहता।













