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नये मध्यप्रदेश का मार्वलस माइलस्टोन साबित होगा इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उद्योगों के उजालों से रौशन हो रहा हमारा मध्यप्रदेश

भोपाल :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विकास एक क्रमिक प्रक्रिया है। प्रदेश में अधिकाधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के जरिए उत्पादन गतिविधियों का विस्तार और निर्यात वृद्धि हमारा प्रमुख लक्ष्य है। हम उद्योग-धंधों को बढ़ावा देकर प्रदेश के औद्योगिक विकास लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश की प्रगति का नया अध्याय है। यह कॉरिडोर सच्चे अर्थों में नये मध्यप्रदेश के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा के किसान हमेशा कमाल करते हैं। प्रदेश के विकास में विशेषकर मालवा क्षेत्र के किसानों का सहयोग और समर्पण अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को इंदौर जिले में ग्राम नैनोद में इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना के तहत 2360 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण के कार्यों का भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर यहां की नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का गेट-वे है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक प्रक्षेत्र सहित पूरे मालवांचल के विकास को नई गति देगा। साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के निर्माण से उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन लागत में कमी आयेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण में सड़क, परिवहन और औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इस कॉरिडोर से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को लाभ मिलेगा और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेश के लिए मध्यप्रदेश को एक आकर्षक गंतव्य बनाएगा तथा बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आधुनिक अधोसंरचनाओं से लैस यह क्षेत्र जल्द ही देश के प्रमुख इंडस्ट्रियल हब के रूप में अपनी पहचान बनायेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लगभग 2360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा यह कॉरिडोर प्रोजेक्ट प्रदेश को निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। करीब 20 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर इंदौर की व्यावसायिक क्षमता और पीथमपुर के औद्योगिक सामर्थ्य के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी और मार्केट में तेजी आएगी। इस परियोजना से 5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और 1 लाख अप्रत्यक्ष, रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना में किसानों के हितों को केंद्र में रखते हुए 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इससे अब वे विकास प्रक्रिया में भागीदार भी बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यदि हमारा मध्यप्रदेश उद्योगों के उजालों से रौशन हो रहा है, तो इसमें किसानों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीनें सरकार को दीं। हमने किसानों की बात सुनी। उनका समर्थन पाया और उन्हें इस कॉरिडोर के निर्माण में भागीदार भी बनाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कॉरिडोर निर्माण में करीब 650 करोड़ रुपये के विकसित प्लॉट किसानों को दिए गए। इससे वे भी विकास के इस महायज्ञ में भागीदार बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसानों की सरकार है। किसानों को कोई भी कष्ट नहीं आने देंगे। अब हम किसानों को चार गुना मुआवजा देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों द्वारा पैदा किए गए गेहूं का दाना-दाना खरीदेंगे। इस उपार्जन सत्र में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाएगा। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली प्रदाय के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों को दिन में ही बिजली देने की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे उन्हें खेतों में रतजगा नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में बीते सभी सिंहस्थों के रिकॉर्ड टूटेंगे। हम ऐसी सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में बनने वाली सड़कों से सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन एवं अन्य प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा कॉरिडोर है, जिससे किसान, ग्रामीण, युवा, उद्योगपति, उद्यमी, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता सभी को लाभ होगा। यह कॉरिडोर क्षेत्र के विकास का नया रिकार्ड कायम करेगा।

मुख्यमंत्री का किसानों ने किया अभिनंदन, जताया आभार

कार्यक्रम के दौरान 60 प्रतिशत विकसित भूमि किसानों को वापस देने तथा किसानों को चार गुना मुआवजा देने के राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णय के लिए क्षेत्रीय किसानों, ग्रामीणों और सरपंचों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का साफा पहनाकर एवं बड़ी गजमाला से आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कृषि देवता भगवान बलराम का चित्र एवं पवित्र हल भेंटकर आभार जताया। इस अवसर पर क्षेत्रीय किसानों ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन को इस कॉरिडोर में भूमि देने के लिए अपना सहमति पत्र प्रदान किया। इसी दौरान किसानों को कॉरिडोर में विकसित भूखंडों के अलॉटमेंट लेटर भी प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 1700 किमी लंबे 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है। प्रदेश में 3 हजार 368 किमी लंबे 6 बड़े एक्सप्रेस-वे, प्रगति पथ और 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क भी विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल नेटवर्क 1 लाख 46 हजार 200 किमी से अधिक हो चुका है। आज हमारे यहां दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क उपलब्ध है। मध्यप्रदेश भी इस मामले में पीछे नहीं है। प्रदेश में दिन-प्रतिदिन नए-नए राजमार्गों की मंजूरी मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5 ग्रीनफ़ील्ड कॉरिडोर्स बनाए जा रहे हैं। आने वाले तीन सालों में मध्यप्रदेश में 6 बड़े एक्सप्रेस-वे और प्रगति पथ विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें नर्मदा प्रगति पथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकास पथ, अटल प्रगति पथ, बुंदेलखंड विकास पथ और मध्य भारत विकास पथ शामिल हैं।

विकास को मिलेगी नई गति, किसान बनेंगे समृद्ध और युवाओं को मिलेगा रोजगार : मंत्री श्री विजयवर्गीय

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में शामिल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष प्रयासों से आकार ले रही यह परियोजना प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बनेगी। यह कॉरिडोर प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और औद्योगिक विस्तार का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। औद्योगिकीकरण के लिए सरकार ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। किसानों को उनकी संतुष्टि के अनुसार उचित मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और उसकी जमीन के बदले ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए कि वह बेहतर विकल्प प्राप्त कर सके। इस योजना के तहत लाभान्वित किसानों को इतना लाभ मिला है कि वे आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं।

मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि इस कॉरिडोर से न केवल औद्योगिक विकास होगा, बल्कि लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। आईटी सेक्टर के साथ ग्रीन इंडस्ट्री का भी विस्तार होगा। यह कॉरिडोर पीथमपुर तक विकसित होगा और एक नया विकसित इंदौर आकार लेगा। यह कॉरिडोर गुजरात और मुंबई से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे व्यापार और परिवहन को नई गति मिलेगी। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी हितधारकों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सराहना की और आभार व्यक्त किया।

कॉरिडोर बनेगा प्रगति और रोजगार का नया आधार : मंत्री श्री सिलावट

जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि यह परियोजना देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। इंदौर और पीथमपुर को जोड़ने वाला यह इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि विकास, प्रगति और उन्नति का मजबूत संकल्प है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर गत वर्ष को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया गया। यह वर्ष मनाने का मुख्य उद्देश्य रोजगार के नए अवसर सृजित करना था। उद्योगों की प्रगति से ही व्यापक स्तर पर रोजगार का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा कृषि आधारित रही है और सरकार किसानों, युवाओं तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह प्रयास देश के समग्र विकास के संकल्प को पूरा करने की दिशा में अहम है। मंत्री श्री सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा मुआवजे की राशि 2 से बढ़ाकर 4 गुना करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमेशा किसानों और अन्नदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित रहते हैं।

सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि यह परियोजना इंदौर और मध्यप्रदेश की जीडीपी को बढ़ाने वाला एक प्रमुख ग्रोथ सेंटर साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रबंधन और दूरदृष्टि का बेहतर उदाहरण है। विधायक श्री मधु वर्मा ने कहा कि यह परियोजना जन सहभागिता का बेहतर उदाहरण है। यह अद्भूत और अनूठी परियोजना है, जिसमें किसानों ने आगे आकर स्वयं सहमति से स्वयं अपनी भूमि दी है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में किसानों को 60 प्रतिशत भूमि प्रतिफल का लाभ मिला है। ऐसा उदाहरण संभवत: देश में कहीं भी नहीं है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में विकसित उज्जैन–इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रदेश के औद्योगिक विकास का एक दूरदर्शी मॉडल है, जिसके अंतर्गत इंदौर–पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रथम चरण प्रारंभ किया जा रहा है। यह कॉरिडोर इंदौर, पीथमपुर और उज्जैन को जोड़ते हुए सुपर कॉरिडोर तथा दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्ट होगा, जिससे 100 किलोमीटर से अधिक का एक सशक्त आर्थिक गलियारा विकसित होगा। परियोजना पर लगभग 2365 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्तावित है, जिसमें प्रथम चरण में लगभग 20 किलोमीटर सड़क निर्माण किया जा रहा है। करीब 1156 हेक्टेयर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, ग्रीन एवं नॉन-पॉल्यूटिंग इंडस्ट्रीज तथा नॉलेज बेस्ड सेक्टर विकसित किए जाएंगे। आधुनिक सुविधाओं में उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें, जल आपूर्ति, लगभग 250 मेगावाट ऊर्जा क्षमता, रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी शामिल हैं। इस परियोजना से लगभग 1 लाख करोड़ रुपए निवेश की संभावना और लगभग 6 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। भूमि अधिग्रहण में किसानों को गाइडलाइन मूल्य का चार गुना मुआवजा देने का निर्णय विकास और सामाजिक संतुलन को मजबूत करता है।

प्रमुख सचिव श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश रोजगार सृजन में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। पीएम मित्र पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक निवेश, 32 कंपनियों की भागीदारी, 3 लाख से अधिक रोजगार और 5 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। प्रदेश में एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में मंडला के चुटका में, रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में मोहदा बबली नर्मदापुरम में बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आई हैं। विभिन्न क्षेत्रों में बड़े निवेश और औद्योगिक विस्तार से प्रदेश तेजी से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।

कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना मालवीय, विधायक श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़, सुश्री उषा ठाकुर तथा श्रीमती नीना वर्मा, श्री सावन सोनकर, श्री श्रवण चावड़ा तथा संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर श्री क्षितिज सिंघल, वीसीएम ग्रुप के श्री अरूण मेहता, शक्ति पम्पस के सीएमडी श्री दिलीप पाटीदार, क्रेडाई इंदौर के अध्यक्ष श्री संदीप श्रीवास्तव, होटल ऐसोसिएशन म.प्र के अध्यक्ष श्री सुमित सूरी, ल्यूगांग इण्डिया लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री वू सॉन्ग, वक्री ग्रुप के श्री सावन लड्ढ़ा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगपति, निवेशक सहित हितधारक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

इंदौर पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना

प्रोजेक्ट का नाम/ लागत – इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर(फेज-फर्स्ट) कुल लागत 2360 करोड़ रुपये

क्षेत्रफल – 1300 हेक्टेयर

आयतन लम्बाई – 20 किमी चौड़ाई – 675 मीटर सड़कों की चौड़ाई – 75 मीटर

सुविधाएं – सुपर कॉरिडोर कनेक्टिविटी, आधुनिक ड्रेनेज, विद्युत आपूर्ति, बेहतर जल संरचनाएं, 60 से अधिक बुनियादी सुविधाएं।

रोजगार सृजन – 5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और 1 लाख का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह कॉरिडोर किसानों को प्रगति का पार्टनर और उद्यमी भी बनायेगा।

लाभ किसे मिलेगा – इन्दौर शहर के आसपास के 17 गांवों के किसानों, ग्रामीणों और युवाओं को मिलेगा सर्वाधिक लाभ।

सरकार और किसानों के बीच सामंजस्य – किसानों को 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इस फैसले से किसानों का सरकार पर भरोसा बढ़ा। वे स्वेच्छा से इस प्रोजेक्ट में जुड़ रहे हैं।

भावी परिणाम – इंदौर, धार, उज्जैन, देवास और शाजापुर मिलकर अब मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास का ‘पेंटागन’ बनेंगे।

सबसे बड़ा लाभ – यह इकोनॉमिक कॉरिडोर इन्दौर की वाणिज्यिक शक्ति और पीथमपुर की औद्योगिक क्षमता के बीच एक सीमलेस कनेक्टिविटी स्थापित करेगा और मल्टी मॉडल लॉजिस्टक पार्क से जुड़कर मध्यप्रदेश को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा।

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