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मुआवजा न मिलने के आरोप में बंधा के विस्थापित ने फांसी लगाने का प्रयास किया, कलेक्टर बोले- उसकी जमीन पर कंपनी नहीं कर रही काम

सिंगरौली/बंधा। ईएमआईएल के बंधा कोल ब्लॉक से जुड़े मुआवजा और विस्थापन के विवाद के बीच रविवार को गंभीर मामला सामने आया। बंधा के बोदरा टोला निवासी विश्वनाथ विंद ने कथित तौर पर फांसी लगाने का प्रयास किया। समय रहते आसपास के लोगों के पहुंचने से उसकी जान बच गई। उसे तत्काल जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर बैढ़न में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

विश्वनाथ विंद का आरोप है कि कोल ब्लॉक परियोजना के लिए जंगल और जमीन पर काम किया जा रहा है, लेकिन उसे उसके हिस्से का मुआवजा नहीं मिला है। उसका कहना है कि उसके पुराने कच्चे मकान का मुआवजा किसी दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया। पीड़ित के अनुसार उसने इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में करीब 10 बार आवेदन दिया तथा कंपनी प्रबंधन को भी कई बार शिकायत और अनुरोध किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

विश्वनाथ का कहना है कि उसके परिवार की आजीविका जंगल और जमीन पर निर्भर रही है। उसका आरोप है कि परियोजना के लिए पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं और प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान नहीं रखा जा रहा। उसने कहा कि यदि मुआवजा संबंधी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो परिवार के सामने गंभीर संकट बना रहेगा।

वहीं, फोन पर चर्चा के दौरान कलेक्टर ने मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनी विश्वनाथ विंद की जमीन पर काम नहीं कर रही है। उनके अनुसार कंपनी फिलहाल जंगल क्षेत्र में काम कर रही है। कलेक्टर के इस बयान के बाद अब मुआवजा किस भूमि और किस परिसंपत्ति के आधार पर किसके नाम स्वीकृत हुआ, यह जांच का विषय बन गया है।

पीड़ित का कहना है कि उसका दावा पुराने मकान और उससे जुड़े मुआवजे को लेकर है और उसने इस संबंध में कई बार प्रशासन तथा कंपनी को जानकारी दी है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने संबंधित दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि मुआवजा किसके नाम स्वीकृत हुआ, भूमि और मकान का रिकॉर्ड क्या है तथा विश्वनाथ विंद की शिकायत पर पहले की गई कार्रवाई क्या रही।

घटना पर कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष राम शिरोमणि शाह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रभावित व्यक्ति को जल्द न्याय मिलना चाहिए, अन्यथा कांग्रेस आंदोलन करेगी। यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है।

बंधा कोल ब्लॉक से जुड़े भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। अब विश्वनाथ विंद द्वारा लगाए गए आरोप और कलेक्टर के बयान के बीच वास्तविक स्थिति दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।

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