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एनएच-39 मरम्मत निविदा निरस्त होने पर घमासान

कांग्रेस ने एनएचएआई और सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

सिंगरौली। सिंगरौली-सीधी नेशनल हाईवे-39 की मरम्मत कार्य से जुड़ी लगभग 28 करोड़ 30 लाख रुपये की निविदा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा निरस्त किए जाने के बाद मामला राजनीतिक रूप से गर्मा गया है। एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल द्वारा जारी पत्र में प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए निविदा प्रक्रिया समाप्त करने की जानकारी दी गई है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी राजेश सिंह तथा वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव अभ्युदय सिंह “डैनी” ने आरोप लगाया है कि पूरी निविदा प्रक्रिया शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है।

कांग्रेस नेताओं ने पूर्व में आयोजित प्रेसवार्ता में दावा किया था कि पहले सड़क मरम्मत के लिए लगभग 14 करोड़ 50 लाख रुपये की निविदा जारी की गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 28 करोड़ 30 लाख रुपये कर दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि टेंडर की कुछ शर्तें विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थीं।

राजेश सिंह ने कहा कि निविदा राशि में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निविदा निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने अब निरस्तीकरण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता राजेश सिंह के अनुसार, एनएचएआई द्वारा जारी पत्र में निविदा निरस्त करने की तारीख 11 मई दर्ज की गई है, लेकिन यह जानकारी लंबे समय तक पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हुई।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि टेंडर वास्तव में 11 मई को ही निरस्त कर दिया गया था तो संबंधित सूचना तत्काल सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।राजेश सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की प्रेसवार्ता और मामले के सार्वजनिक होने के बाद आनन-फानन में निरस्तीकरण पत्र जारी कर पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इससे मामले में पारदर्शिता को लेकर और अधिक संदेह पैदा हो गया है।

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निविदा प्रक्रिया में कहीं अनियमितता या पक्षपात तो नहीं हुआ।

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