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मालवीय नगर अग्निकांड: घायलों से मिलीं सीएम रेखा गुप्ता; मृतकों के परिजनों को 10 लाख और गंभीर घायलों को 5 लाख की सहायता का एलान

नई दिल्ली:दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों को राहत पहुंचाने और उनकी सुध लेने के लिए राजनीतिक दिग्गजों का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मैक्स अस्पताल का दौरा कर घायलों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को उनके बेहतर इलाज के सख्त निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपए की अनुग्रह राशि (मुआवजा) देने की बड़ी घोषणा की।

शवों को स्वदेश भेजने की व्यवस्था में जुटा विदेश मंत्रालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। मृतकों के पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक निवास तक पहुंचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।

चूंकि हादसे में कई विदेशी नागरिकों की भी मौत हुई है, इसलिए विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने भी मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और एम्स (AIIMS) का दौरा कर घायलों से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय इस समय संबंधित देशों के दूतावासों के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यक प्रशासनिक सहायता प्रदान कर रहा है।

विदेशी नागरिकों के इलाज की खुद निगरानी कर रहे हैं विधायक
मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने अस्पताल की स्थिति साझा करते हुए बताया, “यहां कुल 17 लोग उपचाराधीन हैं। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता इन सभी को सुरक्षित रखना है। पीड़ित चाहे केन्या, कैमरून के हों या बांग्लादेश के, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें उत्कृष्ट चिकित्सा उपचार मिले।” उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि घायलों की हालत में कल की तुलना में काफी सुधार है। एक मरीज एम्स ट्रॉमा सेंटर में है, जिसका ऑपरेशन किया गया है और सरकार इसकी सीधी मॉनिटरिंग कर रही है।

हादसे पर राजनीतिक रार: कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली की सियासत भी गरमा गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इलाज से बेहतर बचाव है। ऐसी जानलेवा घटनाओं से बचने के लिए प्रशासन को हमेशा पहले से इंतजाम रखने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब 21 मासूमों की जान चली गई, तब जाकर सरकार की नींद खुली है। अभी भी 15 से 16 लोग वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इस भयानक त्रासदी की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?” फिलहाल, इस बयानबाजी के बीच अस्पतालों में घायलों को बचाने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं।

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