चितरंगी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: विश्व पर्यावरण दिवस पर 2 करोड़ की प्रतिबंधित खैर लकड़ी से लदा ट्रक जब्त, 4 तस्कर गिरफ्तार

सिंगरौली;सिंगरौली जिले की चितरंगी थाना पुलिस ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अवैध वन कटाई और लकड़ी तस्करी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. पुलिस ने घेराबंदी कर प्रतिबंधित खैर की लकड़ी से लदे एक ट्रक को पकड़ने में सफलता हासिल की है. इस मामले में मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
मुखबिर की सूचना पर आमचुआ गांव के पास घेराबंदी
चितरंगी थाना प्रभारी सुदेश तिवारी ने बताया कि पुलिस को मुखबिर के जरिए एक पुख्ता सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने आमचुआ गांव के पास तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध वाहन (ट्रक) को रोककर जब उसकी जांच की, तो उसमें करीब 70 टन प्रतिबंधित खैर की लकड़ी बरामद हुई. पूछताछ में पता चला है कि तस्कर इस कीमती लकड़ी को ट्रक में भरकर उत्तर प्रदेश के कानपुर ले जाने की फिराक में थे.

बाजार में अनुमानित कीमत 2 से 2.25 करोड़ रुपए
जब्त की गई 70 टन खैर की लकड़ी की अनुमानित कीमत बाजार में लगभग 2 करोड़ से 2.25 करोड़ रुपए आंकी जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, खैर की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से कत्था, पान मसाला, कॉस्मेटिक उत्पादों, पेंट और विभिन्न प्रकार की औषधियों के निर्माण के लिए किया जाता है. बाजार में इसकी अत्यधिक और भारी मांग होने के कारण ही तस्कर अवैध रूप से जंगलों से इसकी कटाई कर तस्करी का रैकेट चलाते हैं.
पुलिस को देखकर अन्य आरोपी जंगल में लकड़ी छोड़ भागे
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उनके कुछ अन्य साथी भी अलग-अलग क्षेत्रों में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई में संलिप्त हैं. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीमों को तत्काल संबंधित गांवों में छापेमारी के लिए भेजा गया. हालांकि, पुलिस के आने की भनक लगते ही अन्य सह-आरोपी कटे हुए वृक्षों और लकड़ियों के बंडल को मौके पर ही छोड़कर जंगल की ओर फरार हो गए.
वन विभाग के साथ मिलकर जांच जारी
थाना प्रभारी ने बताया कि इस पूरी घटना और जब्ती की आधिकारिक जानकारी वन विभाग को दे दी गई है. अब पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें मिलकर इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं. फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है. पर्यावरण दिवस पर की गई इस बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक को क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी माफियाओं के खिलाफ प्रशासन का एक कड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.













