राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज, राष्ट्रपति से गुहार लगाएगी कांग्रेस

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सही मानते हुए मीनाक्षी की याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने टिप्पणी की कि कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने का मतलब है कि वह प्रथम दृष्टया शिकायत से सहमत थी, इसलिए इस मामले को चुनाव आयोग के पास ले जाना चाहिए।
दूसरी ओर, मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि उन्होंने कुछ नहीं छिपाया है। फॉर्म 26 में केवल आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है, जबकि उनके खिलाफ सिर्फ एक लीगल नोटिस था, जिसका अदालत ने संज्ञान भी नहीं लिया था।
भाजपा की साजिश या कानूनी चूक?
इस घटनाक्रम को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने कहा, “आजादी के बाद देश में पहली बार राज्यसभा का नामांकन निरस्त हुआ है। हमारे पास 61 विधायकों का पूरा बल था, जिससे डरकर भाजपा ने यह साजिश रची है।”
इस बीच, एकजुटता दिखाने के लिए कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं और मामले में हस्तक्षेप के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति के उत्तराखंड दौरे पर होने के कारण इस मुलाकात की संभावना कम है।
क्या था विवाद?
8 जून को नामांकन के बाद 9 जून की जांच में भाजपा ने आपत्ति जताई थी कि मीनाक्षी ने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी शिकायत की जानकारी शपथ पत्र में छिपाई। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।













