सिंगरौली की जनता के हक पर डाका, DMF फंड के हजारों करोड़ रुपये दूसरे जिलों में भेजे गए : राजेश सोनी
प्रदूषण, बीमारी और सड़क दुर्घटनाएँ हमारी; DMF फंड की मलाई दूसरे जिलों को!

सरकारी दस्तावेजों के आधार पर बड़ा खुलासा
सिंगरौली- jभारत के “ऊर्जांचल” के नाम से प्रसिद्ध सिंगरौली जिला आज भारी उद्योगों और खनन गतिविधियों के कारण गंभीर प्रदूषण, विस्थापन, स्वास्थ्य समस्याओं तथा बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से जूझ रहा है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्राप्त होने वाले जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) फंड के उपयोग को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है।
आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान प्रदेश सचिव राजेश सोनी ने सरकारी दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि पिछले वर्षों में सिंगरौली के DMF फंड से लगभग 1000 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों में स्थानांतरित कर दिए गए, जबकि यह राशि सिंगरौली के खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च की जानी चाहिए थी। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राजेश सोनी ने कहा कि मध्य प्रदेश DMF नियमों के अनुसार इस निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद सिंगरौली के अधिकारों की अनदेखी कर यह राशि अन्य जिलों के निर्माण कार्यों में खर्च की गई।
विभिन्न जिलों को भेजी गई राशि
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार DMF निधि से निम्न जिलों को राशि हस्तांतरित की गई:
सीहोर – 160 करोड़ 92 लाख रुपये ,पन्ना – 132 करोड़ 77 लाख रुपये, निवाड़ी – 103 करोड़ रुपये, डिंडोरी – 102 करोड़ 81 लाख रुपये, सागर – 102 करोड़ रुपये, भोपाल – 91 करोड़ 64 लाख रुपये, जबलपुर – 37 करोड़ 96 लाख रुपये, बालाघाट – 37 करोड़ रुपये, खरगोन – 32 करोड़ 52 लाख रुपये, मंदसौर – 32 करोड़ रुपये, अनूपपुर – 29 करोड़ रुपये, आगर मालवा – 21 करोड़ 93 लाख रुपये, छिंदवाड़ा – 18 करोड़ 61 लाख रुपये, दतिया – 17 करोड़ 10 लाख रुपये, दमोह – 16 करोड़ 54 लाख रुपये, इंदौर – 15 करोड़ 75 लाख रुपये, रायसेन – 15 करोड़ 44 लाख रुपये, बड़वानी – 15 करोड़ रुपये, टीकमगढ़ – 7 करोड़ रुपये, नीमच – 7 करोड़ रुपये, अशोकनगर – 6 करोड़ 50 लाख रुपये, शाजापुर – 5 करोड़ 65 लाख रुपये, अलीराजपुर – 5 करोड़ 43 लाख रुपये, रीवा – 5 करोड़ 41 लाख रुपये, सीधी – 4 करोड़ 50 लाख रुपये।
प्रमुख आरोप एवं मुद्दे
1. सिंगरौली को प्रदूषण और बीमारी, दूसरों को विकास
राजेश सोनी ने कहा कि चितरंगी और देवसर क्षेत्र के अनेक ग्रामीण आज भी स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं तथा नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। बैढ़न शहर में बढ़ती आबादी के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की कमी बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर कोयला और राख परिवहन के कारण प्रतिदिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं और कई निर्दोष लोगों की जान जा रही है, जबकि सिंगरौली का DMF फंड अन्य जिलों में विकास कार्यों पर खर्च किया जा रहा है।
2. नियमों का उल्लंघन
राजेश सोनी के अनुसार DMF की मूल भावना और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों के बजाय अन्य जिलों में भेजी गई। इससे विस्थापित आदिवासियों, ग्रामीणों तथा युवाओं के लिए निर्धारित विकास एवं कौशल विकास योजनाएँ प्रभावित हुई हैं।
3. जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के सत्ताधारी जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार नेता इस पूरे मामले पर मौन हैं। जनता पिछले दो दशकों से लगातार अपने प्रतिनिधियों को चुनती आ रही है, लेकिन उनके सामने ही सिंगरौली के अधिकारों का हनन हुआ और किसी ने इसका विरोध नहीं किया।
सरकार और प्रशासन को चेतावनी
राजेश सोनी ने मांग की है कि सिंगरौली से स्थानांतरित की गई DMF निधि को 15 दिनों के भीतर वापस जिले के खाते में जमा कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सिंगरौली के ग्रामीणों, आदिवासियों, युवाओं और आम नागरिकों के साथ कलेक्ट्रेट का विशाल घेराव किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।राजेश सोनी ने कहा, “सिंगरौली का हक सिंगरौली में ही खर्च होना चाहिए। जिले के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी स्तर पर हर संभव संघर्ष किया जाएगा।”
प्रेस वार्ता में आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला विंग) अनिता बैस तथा प्रदेश संयुक्त सचिव श्याम सुंदर विश्वकर्मा भी उपस्थित रहे।













