हॉर्मुज में हालात सामान्य होने से भारत को राहत, ईरानी तेल की वापसी पर बढ़ी उम्मीद

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से बढ़ने लगी है, जिससे भारत को बड़ी राहत मिली है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति सामान्य होने की दिशा में बढ़ रही है। विदेश मंत्रालय को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाज भी जल्द सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे।
भारत लंबे समय तक ईरान के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल रहा है। वर्ष 2010 के आसपास ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता था। वित्त वर्ष 2009-10 में भारत ने ईरान से 2.21 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था, जो उस समय देश के कुल तेल आयात का लगभग 14 प्रतिशत था। हालांकि बाद में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरानी तेल आयात में भारी कटौती करनी पड़ी।
मार्च 2026 में अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में सीमित राहत दिए जाने के बाद भारत ने अप्रैल में ईरान से सीमित मात्रा में तेल खरीदा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तथा प्रतिबंधों में और ढील मिलती है, तो भारत एक बार फिर ईरानी तेल को अपने ऊर्जा स्रोतों में शामिल करने पर विचार कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में रूस भारत को सबसे अधिक कच्चा तेल निर्यात कर रहा है और जून 2026 में भारत के कुल तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत रही है। इसके अलावा सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की संभावित वापसी भारत को ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में अतिरिक्त विकल्प प्रदान कर सकती है। वहीं हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका वार्ता और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में उठाए जाने वाले कदम न केवल पश्चिम एशिया बल्कि भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।











