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नवजीवन रहवासी कल्याण समिति ने सौरा नाले किनारे किया सामुदायिक वृक्षारोपण, 400 पेड़ लगाए

सिंगरौली- मानसून के दौरान स्थानीय रहवासियों के सहयोग से सौरा नाले के संरक्षण और आसपास के पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नवजीवन रहवासी कल्याण समिति ने नाले के किनारे एक बड़ा सामूहिक वृक्षारोपण किया। समिति ने नाले के पास जो अवैध कचरा डंपिंग हो रही थी, उसे साफ कर नाले के किनारे विभिन्न फलों व छायादार प्रजातियों के कुल 400 पौधे रोपित किए।
रोपित प्रजातियों में आम, अमरूद, चीकू, जामुन, बेल, अशोक, पीपल और नीम प्रमुख हैं, जिनका चयन दीर्घकालिक छाया, फल और पारिस्थितिक लाभ ध्यान में रखकर किया गया। समिति का कहना है कि समुदायिक भागीदारी से पेड़ों की देखभाल और संरक्षण बेहतर तरीके से सुनिश्चित होगा, जिससे न केवल नाले की सफाई और दुर्गंध में कमी आएगी बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और वायु गुणवत्ता में भी सुधार होगा।


वृक्षारोपण का शुभारंभ समिति के संस्थापक व संरक्षक राजेन्द्र सिंह बघेल, नगर निगम के कार्यपालन यंत्री संतोष पांडेय, अध्यक्ष राजकिशोर सिंह तथा समिति के संयुक्त सचिव शाहनवाज और समाजसेवी व सदस्य डी.के. भरतिया ने किया। इसके बाद सचिव शशिधर गर्ग, कोषाध्यक्ष सत्यनारायण बंसल, उपाध्यक्ष आनंद अग्रवाल तथा कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती सुषमा अग्रवाल, श्रीमती इंदू सिंह, मनीष अग्रवाल सहित मोहल्ले और आसपास के रहवासियों ने मिलकर एक-एक कर पौधे रोपे। एमआईजी से मुद्दू श्रीनिवास, सौरभ अग्रवाल, अरविंद दिवाकर, अनुराग भरतिया, डी.के. अग्रवाल, सुनील गुप्ता, श्रीमती रागिनी सिंह, दिग्विजय सिंह, अरुण कुमार सिंह, रंजन वर्मा और राजेश गुप्ता, डॉ शशि श्रीवास्तव,पवन सिंह,जयभगवान,कृष्ण कुमार गर्ग,राजेश नारायण, तारकेश्वर, ओमप्रकाश बंसल, सुलोचना सिंह, उपासना सिंह,आरती तिवारी,रेनू सिंह, ममता गोयल,निशा बंसल,ममता अग्रवाल,मंजू बंसल, अजीत तिवारी जैसे कई कार्यकर्ता व निवासी भी इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

समिति ने बताया कि यह वृक्षारोपण न केवल सौरा नाले की सुरक्षा और कचरा प्रबंधन में मदद करेगा, बल्कि वर्षा के मौसम में मिट्टी कटाव को रोकने, जलधाराओं को संरक्षित करने और स्थानीय जैवविविधता बढ़ाने में भी सहायक होगा। समिति आगे नियमित निगरानी, जल देने और दशाानुसार आवश्यक देखभाल का आश्वासन दे रही है ताकि रोपे गए पौधे सुरक्षित रूप से बढ़ें और पर्यावरणीय लाभ समय के साथ स्पष्ट दिखाई दें।

समुदाय के सहयोग से किया गया यह प्रयास स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की सोच को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है, और समिति ने भविष्य में भी इसी तरह की सभाओं और जागरूकता अभियानों के आयोजन का संकेत दिया है।

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