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सपना अधूरा साढ़े 9 करोड़ रूपये फण्ड दिलाने का

जिपं सीईओ ने करीबी एनजीओ में साढ़े 9 करोड़ का फंड दिलाने कलेक्टर से लिखवा लिया चि_ी
पोल खोल सिंगरौली
जिला पंचायत के सीईओ के एक अपने करीबी एनजीओ पर इतना मेहरवान हुये कि एनजीओ को करोड़ों रूपये फण्ड दिलवाने के लिए दो वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर अरूण कुमार परमार का सहारा लिया।
जहां तत्कालीन कलेक्टर ने एनसीएल सीएमडी सिंगरौली को अनुरोध भरा पत्र लिखा। हालांकि कलेक्टर के पत्राचार के एवज में करीब 24 लाख रूपये मधुमक्खी पालन कराने के नाम पर समूहो को बजट मुहैया करवाने में कुछ हद तक सफल रहे हैं। इस एनजीओ पर सीईओ की मेहरवानी चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
दरअसल ऐसा ही एक मामला जिला पंचायत सिंगरौली का प्रकाश में आया है। सीईओ के बेहद करीबी देवर्षी भट्टाचार्य के एनजीओ सीईओ केयर इंडिया साल्यूशन फॉर सस्टनेबल डेवलपमेंट को करोड़ों रुपये के खजाने से मालामाल कर देने की इच्छा पाल रहे थे, जिसकी इच्छा तब और बलवती हो गई जब जिले में कलेक्टर के रूप में अरुण कुमार परमार पदस्थ हुए।
तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार परमार जिला पंचायत के जिम्मेदार के भरोसे के भवरजाल में फंस गए। जिसका फायदा जिला पंचायत के सीईओ ने जमकर उठाया भी है। बताया जाता है कि गत 1 मई 2023 को 9 करोड़ 44 लाख का एक प्रस्ताव बनवाकर कलेक्टर के पास भेजा, जहां 9 मई 2023 को इस जिम्मेदार ने एनसीएल के सीएमडी को कलेक्टर अरुण कुमार परमार से अपनी करीबी देवर्षी भट्टाचार्य के एनजीओ को सीएसआर मद से 9 करोड़ 44 लाख 55 हजार 144 रूपए का प्रस्ताव के साथ चि_ी लिखवा लिया।
बताया जाता है कि जिम्मेदार के करीबी एनजीओ जिले की महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए काम करने की इच्छुक है, लेकिन एनसीएल के सीएमडी ने फंड देने से साफ इंकार कर दिया, जिससे जिम्मेदार को बड़ा झटका लग गया।
कलेक्टर ने सीएमडी को अनुरोध भरा लिखा था पत्र
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला पंचायत के सीईओ नागेश सिंह ने करीबी एनजीओ देवर्षी भट्टाचार्य को लाभ दिलाने कलेक्टर श्री परमार से एनसीएल के सीएमडी को ऐसा लाचारी भरा पत्र लिखवा दिया, जिससे कलेक्टर ने सीएमडी को बजट के लिए अनुरोध कर रहे हैं और कष्ट करें जैसा शब्दावली वाला पत्र लिखवा दिया है।
अरे साहब अंडर टेकिंग कंपनी के सीएमडी से कई गुना कलेक्टर का पद बड़ा है। जों पैसे के लिए स्तरहिन बना दिया। भारत के संविधान में कलेक्टर असीमित शक्तियां प्रदत्त हैं। वहीं अब चर्चा है कि उक्त एनजीओ पर इतनी मेहरवानी अधिकारी क्यों दिखा रहे थे, इसके पीछे क्या राज छुपा है। इसकी गहराई से जांच कराने की मांग शुरू हो गई है।
मधुमक्खी के बजट से संतोष
सूत्रों के द्वारा बताया जाता है कि साहब ने एनसीएल से भले ही साढ़े 9 करोड़ रूपये दिलवाने में असफल रहे हो, लेकिन मधुमक्खी पालन का 24 लाख का बजट समूहों से खाते में डलवाने में कामयाब जरूर हों गए।
अब क्या न मधुमक्खी पली और न ही महिलाएं शशक्त हुईं। साहब की इच्छा जरूर पूरी हों गई। इस बात को लेकर इन दिनों चर्चाओं का विषय गर्म है। साथ ही सीईओ जिला पंचायत भी सवालों के कटघर्रे में घिरते नजर आये।













