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सिंधिया राजघराने के ₹40 हजार करोड़ संपत्ति विवाद में नया मोड़, पद्माराजे सिंधिया की बेटी ने ठोका दावा

 

ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की करीब ₹40 हजार करोड़ मूल्य की संपत्ति को लेकर चार दशक से चल रहे बहुचर्चित कानूनी विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं उषा राजे, वसुंधरा राजे तथा यशोधरा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए समझौते पर अदालत की मुहर लगने से पहले स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने कैविएट दायर कर ननिहाल की संपत्ति पर अपना दावा पेश कर दिया है। इससे वर्षों पुराना यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।

मंगलवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तावित समझौते पर सुनवाई होनी है। प्रतिमा देवी ने कैविएट के जरिए अदालत से अनुरोध किया है कि उनके पक्ष को सुने बिना मामले में कोई अंतिम आदेश पारित न किया जाए। माना जा रहा है कि इस दावे के बाद अदालत को यह भी तय करना होगा कि प्रस्तावित समझौता सभी संभावित उत्तराधिकारियों के अधिकारों को प्रभावित तो नहीं करता।

करीब चार दशक पुराने इस विवाद में हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच समझौता हुआ था, जिससे लंबे समय से लंबित मुकदमे के समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि नए दावे के बाद कानूनी स्थिति एक बार फिर जटिल हो गई है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत कैविएट को स्वीकार कर विस्तृत सुनवाई का निर्णय लेती है तो समझौते पर तत्काल अंतिम मुहर लगना मुश्किल हो सकता है।

यह विवाद वर्ष 1989 में दायर उस दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्वयं को राजघराने की संपत्ति का एकमात्र उत्तराधिकारी बताते हुए ज्येष्ठाधिकार (प्राइमोजेनिचर) की परंपरा का हवाला दिया था। दूसरी ओर उनकी बुआओं ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत संपत्ति में समान अधिकार का दावा किया। उनका तर्क था कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत और संबंधित दस्तावेजों के अनुसार सभी उत्तराधिकारियों को बराबरी का अधिकार प्राप्त है।

मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 1961 से जुड़ी है, जब महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के निधन के बाद माधवराव सिंधिया को निजी संपत्तियों का उत्तराधिकारी माना गया था। बाद में वर्ष 1984 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने वसीयत और ट्रस्ट के माध्यम से संपत्ति के बंटवारे की व्यवस्था तय की। इसके बाद 1989 में यह विवाद अदालत पहुंचा और तब से लगातार न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

अब प्रतिमा देवी के दावे ने इस बहुचर्चित मुकदमे को नया कानूनी आयाम दे दिया है। ग्वालियर जिला न्यायालय की सुनवाई पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि समझौते को तत्काल मंजूरी मिलेगी या संपत्ति विवाद एक बार फिर विस्तृत न्यायिक परीक्षण के दौर में प्रवेश करेगा।

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