खनन पट्टा मामले में ओमैक्स मिनरल्स के निदेशक सचिन अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर के आदेश, न्यायालय ने दिए जांच के निर्देश

सोनभद्र। खनन पट्टा लेने में कथित कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सोनभद्र ने ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. के निदेशक सचिन अग्रवाल सहित संबंधित पक्षों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
मामला प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र संख्या 681/2026 चंदन दूबे बनाम सचिन अग्रवाल आदि से जुड़ा है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता ब्रज भूषण तिवारी ने न्यायालय में धारा 173(4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि ग्राम खेबंधा, थाना जुगैल, तहसील ओबरा क्षेत्र में बालू-मोरंग खनन के लिए स्वीकृत पट्टे की रजिस्ट्री में कथित रूप से गलत दस्तावेजों का उपयोग किया गया।
आवेदक का आरोप था कि 23 जनवरी 2023 को हुई खनन पट्टा रजिस्ट्री के दौरान सचिन अग्रवाल ने स्वयं को कंपनी का निदेशक बताते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जबकि उनके द्वारा 14 नवंबर 2022 को ही निदेशक पद से इस्तीफा दिए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि निदेशक पद पर नहीं रहते हुए दस्तावेजों में हस्ताक्षर कर सरकारी अभिलेखों में कूटरचना की गई।
न्यायालय ने प्रकरण के दस्तावेजों और खनन अधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें जालसाजी, कपट एवं कूटरचित दस्तावेजों से जुड़े संज्ञेय अपराध की संभावना प्रतीत होती है। न्यायालय ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस विवेचना आवश्यक है।
न्यायालय ने थाना प्रभारी जुगैल को निर्देशित किया है कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर अभियोग पंजीबद्ध कर नियमानुसार जांच सुनिश्चित की जाए। आदेश के बाद अब पुलिस द्वारा मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।












