1200 विद्यार्थियों के स्कूल में सिर्फ 25 अभिभावक, एसएमसी चुनाव पर उठे सवाल
देवसर उत्कृष्ट विद्यालय में गुपचुप निर्वाचन का आरोप, पूर्व प्राचार्य को अध्यक्ष बनाए जाने पर भी विवाद

सिंगरौली। विकासखंड देवसर स्थित शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के निर्वाचन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिभावकों ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने और नियमों की अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य सीपी प्रजापति की मौजूदगी में बिना व्यापक सूचना दिए सीमित लोगों की मौजूदगी में समिति का गठन कर दिया गया।
1200 विद्यार्थियों पर पहुंचे महज 25 अभिभावक
विद्यालय में करीब 1200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन निर्वाचन के दौरान केवल 25 अभिभावकों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि निर्वाचन की सूचना व्यापक स्तर पर नहीं पहुंचाई गई और कुछ चुनिंदा लोगों को ही बुलाकर प्रक्रिया पूरी कर दी गई। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या वाले विद्यालय में अभिभावकों की बेहद कम उपस्थिति अपने आप में निर्वाचन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
भारी बारिश के बीच निर्वाचन कराने का आरोप
अभिभावकों के अनुसार निर्वाचन ऐसे समय कराया गया, जब देवसर क्षेत्र भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित था। एक दिन पूर्व ही बारिश के चलते विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था। निर्वाचन के दिन भी क्षेत्र में तेज बारिश जारी रही। इसी दौरान सेमरा नदी में एक युवक के बहने की घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय लोग राहत एवं तलाश अभियान में जुटे हुए थे। अभिभावकों का आरोप है कि ऐसी परिस्थितियों के बीच निर्वाचन कराकर प्रक्रिया को सीमित लोगों तक रखा गया।
पूर्व प्राचार्य को अध्यक्ष बनाने पर विवाद
सबसे बड़ा विवाद एसएमसी अध्यक्ष के चयन को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद प्रत्यक्ष अभिभावक को मिलना चाहिए, जबकि पूर्व प्राचार्य लाला सिंह मार्के को अध्यक्ष बनाए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि विद्यालय में अध्ययनरत एक विद्यार्थी से उनका पारिवारिक संबंध है। अभिभावकों ने इस चयन की वैधता और पात्रता की जांच कराने की मांग की है।
पुनः निर्वाचन की मांग
मामला सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि एसएमसी जैसी महत्वपूर्ण समिति का गठन पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार होना चाहिए। अभिभावकों ने वर्तमान समिति के गठन की जांच कर आवश्यक होने पर उसे निरस्त करने तथा
सभी अभिभावकों को सूचना देकर पुनः निर्वाचन कराने की मांग की है।













