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कोटा ग्राम की महिला बेला देवी ने रोके सैकड़ों राखड़ वाहन, समर्थन में पहुंचे ग्राम प्रधान समेत सैकड़ों ग्रामीण

2 दिन में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो एनटीपीसी के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी

शक्तिनगर। शक्तिनगर थाना क्षेत्र के कोटा बस्ती ग्राम में राखड़ वाहनों के आवागमन को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का विरोध सामने आया। सड़क पर लगातार आ रहे राखड़ के बड़े वाहनों को लेकर बेला देवी ने सैकड़ों वाहनों को रोक दिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और जाम की स्थिति बन गई।

बेला देवी के विरोध की जानकारी होने पर ग्राम पंचायत कोटा के प्रधान प्रमोद तिवारी मौके पर पहुंचे और उनका समर्थन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। ग्रामीणों का कहना था कि भारी वाहनों के लगातार आवागमन और सड़क पर राख गिरने से लोगों को परेशानी हो रही है। राख सूखने के बाद धूल उड़ने से आसपास के लोगों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

जाम की स्थिति की जानकारी मिलने पर एनटीपीसी के एचआर शशांक मिश्रा मौके पर पहुंचे। मौके पर ही ग्राम प्रधान प्रमोद तिवारी ने उन्हें पत्र सौंपकर समस्या से अवगत कराया। प्रधान ने मौके पर एनटीपीसी अधिकारी के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि यदि एक-दो दिन में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।

पत्र में ज्वालामुखी-कोटा, कोटा-खड़िया और कोटा-तेलगवां मार्ग पर बड़े वाहनों के आवागमन से सड़क की स्थिति खराब होने और जाम की समस्या का उल्लेख किया गया। स्कूल समय में बड़े वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए सुबह 7 से 9 बजे और दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया।

इसके साथ ही सड़क पर प्रतिदिन पानी का छिड़काव कराने और नियमित रूप से सड़क की सफाई कराने की बात भी पत्र में रखी गई, ताकि सड़क पर जमा राख और धूल की समस्या को कम किया जा सके। वहीं ज्वालामुखी मंदिर से पीडब्ल्यूडी मोड़ होते हुए कोटा चौराहा तक वाहनों की गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित करने का सुझाव दिया गया।

इस दौरान बेला देवी, चंदन सिंह, राजकुमार, लव शर्मा, उत्सव गिरी, सकलदेव सिंह, वीरू कुमार, विक्की शाह और रौनक कुमार समेत सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। मौके पर ग्रामीणों ने एनटीपीसी अधिकारी के सामने राखड़ वाहनों से जुड़ी समस्याओं को रखा।

अब देखना होगा कि मौके पर दिए गए पत्र और ग्रामीणों की चेतावनी के बाद एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से समस्या के समाधान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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