शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन गूंजी माता सती की भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम की गाथा
संत श्री लवदास जी महाराज ने सुनाया माता सती और राजा दक्ष के यज्ञ का प्रसंग, अहंकार त्यागकर भक्ति के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

सिंगरौली :श्री नारायण सेवा समिति व्यापार मंडल बैढ़न द्वारा रामलीला मैदान बैढ़न में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा वाचक पूज्य संत श्री लवदास जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा के साथ माता सती के जन्म, उनके जीवन प्रसंग और भगवान शिव के प्रति उनके अटूट प्रेम एवं समर्पण की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में भाव-विभोर नजर आए।
महाराज जी ने कहा कि माता सती का जीवन भगवान शिव के प्रति पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है। उनकी भक्ति में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं था। उन्होंने भगवान शिव को ही अपने जीवन का सर्वस्व माना। माता सती की भक्ति यह संदेश देती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, आस्था और विश्वास कमजोर नहीं पड़ना चाहिए।
राजा दक्ष के यज्ञ का प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
कथा के दौरान राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ और उसमें भगवान शिव के प्रति किए गए अपमानजनक व्यवहार का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। संत श्री लवदास जी महाराज ने बताया कि भगवान शिव के प्रति अपमानजनक व्यवहार देखकर माता सती अत्यंत व्यथित हुईं। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को अहंकार के दुष्परिणामों से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने पद, प्रतिष्ठा, धन अथवा सामर्थ्य का कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देता है और अंततः उसके पतन का कारण बनता है। भगवान शिव सरलता, करुणा, त्याग और समभाव के प्रतीक हैं। शिव का सच्चे मन से स्मरण करने वाला व्यक्ति जीवन में आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
नौ प्रकार की भक्ति का बताया महत्व
संत श्री लवदास जी महाराज ने कथा के माध्यम से नौ प्रकार की भक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। श्रद्धा, सेवा, भगवान का स्मरण, सत्संग, सदाचार और परोपकार भी भक्ति के महत्वपूर्ण स्वरूप हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अहंकार, क्रोध और नकारात्मक विचारों का त्याग कर शिव नाम का निरंतर स्मरण करने तथा अपने जीवन में धर्म, सेवा, प्रेम और सदाचार को अपनाने का आह्वान किया। महाराज जी ने कहा कि शिव महापुराण की कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि इसके संदेश को अपने जीवन में उतारने के लिए है।
शिव आराधना से मन को मिलती है शांति
कथा के दौरान भगवान शिव की साधना और पूजन की महिमा बताते हुए बेलपत्र, जल एवं विधि-विधान से शिव आराधना के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। महाराज जी ने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है। जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर भी व्यक्ति को धैर्य बनाए रखते हुए ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अहंकार और नकारात्मकता का त्याग कर सेवा, प्रेम, करुणा और भक्ति के मार्ग पर चलता है तो उसका जीवन सार्थक हो सकता है।
कथा स्थल पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन बुजुर्गों, युवाओं, मातृशक्तियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा स्थल पर पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा। भगवान शिव के जयकारों और भजनों से पूरा परिसर गूंजता रहा। श्रद्धालु संत श्री लवदास जी महाराज के मुखारबिंद से कथा का रसपान करते हुए भाव-विभोर दिखाई दिए।
श्री नारायण सेवा समिति व्यापार मंडल बैढ़न के सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आगामी दिवसों में भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिव महापुराण कथा का श्रवण करने और संत श्री लवदास जी महाराज के आध्यात्मिक संदेशों का लाभ लेने की अपील की।
प्रमुख रूप से रहे उपस्थित
कथा श्रवण हेतु प्रमुख रूप से नगर निगम महापौर रानी अग्रवाल, आम आदमी पार्टी ग्रामीण जिलाध्यक्ष रतिभान प्रसाद साकेत, गोपाल अग्रवाल, अशोक सिंह, सजन अग्रवाल, राजाराम केसरी, सत्यनारायण सोनी, एसडी सिंह, मिथिलेश मिश्रा, संजय ताम्रकार, संत कुमार सिंह राठौड़, बीपी अग्रहरि (भानू), संजीव अग्रवाल, संजय केसरी, पवन श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुमार गुप्ता, अजय नारायण श्रीवास्तव, प्रदीप बंसल, डॉ. डीके मिश्रा, गोविंद प्रसाद पांडेय, डीएन हिम्मत राम, डॉ. ओपी राय, कामतानाथ केसरवानी, पवन अग्रवाल, गोपालदास गोयल, बनवारी लाल केसरी, नीरज कारीवाल, अमित राज, रामेश्वर दास गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता, सीमा जायसवाल, विवेक कुमार त्रिपाठी एवं बृजेश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।











