बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्य प्रदेशसिंगरौली

खैडा़र पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की जांच में जमकर हुई लीपापोती

ग्रामीण यांत्रिकी विभाग और जिला पंचायत की लेखाधिकारी ने खेल दिया गेम

सिंगरौली। जिले की जनपद पंचायत चितरंगी के ग्राम पंचायत खैड़ार में हुए भ्रष्टाचार को लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर से शिकायत की गई थी। जिला पंचायत सीईओ ने कई बिंदुओं को बड़े प्राथमिकता में लेकर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री और जिला पंचायत की लेखा अधिकारी को जांच करने का आदेश 24 जून 2026 को दिया था। सीईओ ने अपने पत्र में लिखा था कि ग्राम पंचायत खैड़ार अंतर्गत गुणवत्ता विहिन निर्माण कार्य एवं फर्जी मूल्यांकन कर राशि आहरित किए जाने संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है जिसकी विधिवत जांच कराई जाए, लेकिन अधिकारियों ने कमीशन के लालच में आकर जांच में जमकर लीपा पोती की है। कहीं ना कहीं इस पूरे मामले में कलेक्टर को भी अंधेरे में रखा गया है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को इस मामले में संज्ञान लेने का ध्यान आकर्षण करवाया है।

इधर जानकारी में बता दें कि ग्राम पंचायत खैड़ार में निर्माण कार्यों के नाम पर कथित अनियमितताओं की शिकायत अब जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों द्वारा गुणवत्ताविहीन निर्माण, फर्जी मूल्यांकन और बिना कार्य कराए राशि आहरित किए जाने की शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ जगदीश कुमार गोमे ने 24 जून 2026 को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री, जिला पंचायत के लेखाधिकारी तथा जनपद पंचायत चितरंगी के खंड पंचायत अधिकारी को विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच में गंभीर बिंदुओं को दरकिनार कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। शिकायत में खैड़ार पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों में अनुमानित लागत का महज 15 से 30 प्रतिशत काम कराकर शत-प्रतिशत मूल्यांकन के आधार पर राशि निकालने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई कार्यस्थलों पर वास्तविक निर्माण की स्थिति और अभिलेखों में दर्शाई गई प्रगति में बड़ा अंतर है। जिला पंचायत के आदेश में शिकायत के 19 बिंदुओं की स्पष्ट और विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश की प्रति कलेक्टर सिंगरौली को भी सूचनार्थ भेजी गई थी। शिकायत में सोख्ता गड्ढा, नाडेप, लघु तालाब, चेकडेम, गैवियन, तालाब, वृक्षारोपण, पीसीसी सड़क और कलवर्ट पुलिया सहित कई कार्यों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

सबसे गंभीर आरोप लघु तालाबों को लेकर हैं।शिकायतकर्ताओं के अनुसार करीब 30-30 मीटर की दूरी पर एक ही क्षेत्र में कई तालाब स्वीकृत कराए गए और मौके पर नाममात्र का निर्माण कराकर पूरी राशि निकाल ली गई। इसी तरह झरिया नाला में करीब 20 लाख रुपये के चेकडेम निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि कई चेकडेम निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गए और पानी रोकने में भी सक्षम नहीं हैं।

सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों का खेल
घटवा नाला सौंदर्यीकरण कार्य में भी महज कुछ घंटे जेसीबी चलाकर लाखों रुपये का मस्टर रोल जारी करने तथा मजदूरों के नाम पर राशि आहरित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।शिकायतकर्ताओं ने फर्जी बिल और बिना सामग्री कार्यस्थल पर पहुंचाए भुगतान किए जाने के भी आरोप लगाए हैं। कलवर्ट पुलिया के छह कार्यों में पाइप मिट्टी पर रखकर भुगतान किए जाने तथा पीसीसी निर्माण के कुछ ही समय में टूटने का दावा भी शिकायत में किया गया है। वर्ष 2022 से 2026 के बीच कराए गए सार्वजनिक तालाब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

जांच के पारदर्शिता पर खड़ा हो रहा सवाल
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जिला पंचायत सीईओ ने स्वयं गंभीर शिकायत पर जांच के आदेश दिए और कलेक्टर को भी अवगत कराया, तो जांच रिपोर्ट में शिकायत के सभी बिंदुओं की वास्तविकता सामने आई या नहीं? यदि जांच निष्पक्ष हुई है तो शिकायतकर्ताओं के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? वहीं, यदि आरोप निराधार हैं तो मौके की तकनीकी जांच और अभिलेखों के आधार पर स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? खैड़ार पंचायत का यह मामला अब केवल कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Author

Related Articles

Back to top button