राखी बांधने जेल पहुंची बहनें, भाई से मिले बिना रोती हुई लौटीं बहनो ने कहा केवल मुलाकात तो करवा दीजिए

रक्षाबंधन के पर्व पर जेल प्रशासन की व्यवस्था पर उठे सवाल, बहनों ने कहा—हम सिर्फ राखी बांधने आए थे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेना होगा
सिंगरौली। रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के प्रेम और रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ कुछ बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए जेल पहुंचीं, लेकिन उन्हें भाई से मिलने का अवसर नहीं मिला। जेल के दरवाजे से बहनें मायूस और रोती हुई वापस लौट गईं।
बहनों का कहना था कि वे जेल में बंद अपने भाई से मिलने और केवल उसकी कलाई पर राखी बांधने के लिए आई थीं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन या विरोध करना नहीं था। इसके बावजूद उन्हें भाई से राखी बांधने की अनुमति नहीं मिल सकी।
ठीक है मिष्ठान या किसी भी प्रकार के पकवान ना खाने दिए जाए इस पर रोक लगे मगर कम से कम बहनों की कलाई में रक्षा सूत्र तो बांधा जा सकता था ऐसे नियमो सुधार करने की आवश्यकता है सरकार को कई बड़े ऐसे जेल हैं जहां इस प्रकार के आयोजन किए जाते हैं
इस पूरे मामले को लेकर जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। जब पहले से ही मालूम था कि रक्षाबंधन का पर्व है और इस दौरान बड़ी संख्या में बंदियों की बहनें उनसे मिलने पहुंचेंगी, तो प्रशासन को पहले से ही आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए थीं। कम से कम ऐसी व्यवस्था तो होनी चाहिए थी कि बहनें अपने भाइयों से मिलकर उन्हें राखी बांध सकें।
भाई-बहन के इस भावनात्मक पर्व पर बहनों का जेल के बाहर से ही वापस लौटना व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा या अन्य किसी कारण से सामान्य मुलाकात में परेशानी थी, तो प्रशासन को पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
जवकी इन्ही जेलो में कैदियो से मुलाकात करने के लिए लंबी चौड़ी विना दक्षिणा लिए मुलाकात नही करने दिया जाता है यह जग जाहिर है कड़वा है पर सत्य है !











