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मोरवा में एनसीएल विस्थापन की अनियमितताओं के खिलाफ नई आवाज, पुनर्वास सेवा संघ का गठन

जयंत खदान विस्तार से प्रभावितों ने उठाए R&R और मुआवजे के सवाल, 2011 की तर्ज पर नियमानुसार लाभ दिलाने का संकल्प

सिंगरौली। मोरवा क्षेत्र में जयंत खदान के विस्तार के लिए एनसीएल द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं। क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में प्रभावित परिवारों के मकानों की नापी और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कई परिवार अपने मकान तोड़कर मुआवजा भी प्राप्त कर चुके हैं। इसी बीच एनसीएल विस्थापन के तहत मिलने वाले पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) लाभ को लेकर प्रभावित परिवारों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

विस्थापितों का कहना है कि पूर्व में, विशेषकर वर्ष 2011 में हुए विस्थापन के दौरान जिन परिस्थितियों और नियमों के आधार पर लाभ दिए गए थे, वर्तमान प्रक्रिया में उनमें अंतर दिखाई दे रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि पूर्व में मिले विस्थापन लाभ के आधार पर वर्तमान R&R लाभों में कटौती की जा रही है। इससे विस्थापित परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर मोरवा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-5 में बूढ़ी माई मंदिर के पास ‘सिंगरौली पुनर्वास सेवा संघ’ के कार्यालय का उद्घाटन किया गया। संगठन का उद्देश्य एनसीएल विस्थापन से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सामने लाना और उन्हें नियमानुसार विस्थापन एवं पुनर्वास लाभ दिलाने के लिए आवाज उठाना बताया गया है।

विस्थापितों के हक के लिए संगठन बनाने का दावा

संघ के गठन में पूर्व विधायक रामलल्लू वैश्य को संरक्षक, देवसर विधायक राजेंद्र मेस्राम को संयोजक, त्रिवेणी सिंह को अध्यक्ष, प्रयागलाल वैश्य को सचिव तथा भगवान दास वैश्य को कार्यालय मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। संगठन में अन्य पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है।

संघ का कहना है कि मोरवा में एनसीएल की खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित परिवारों के सामने केवल मुआवजे का ही नहीं, बल्कि पुनर्वास, पुनर्स्थापन, आवास, भूमि और अन्य R&R लाभों का भी सवाल है। इसलिए विस्थापन की पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बनाए जाने की जरूरत है।

सरकारी, वन भूमि ,एग्रीमेंट और पट्टे पर बसे परिवारों का भी उठेगा मुद्दा

सिंगरौली पुनर्वास सेवा संघ के अनुसार सरकारी भूमि, वन भूमि, पट्टे की जमीन या वैध एग्रीमेंट के आधार पर वर्षों से बसे परिवार भी विस्थापन की प्रक्रिया से प्रभावित हो रहे हैं। संगठन का आरोप है कि ऐसे परिवारों को उनके अधिकार और पात्रता के अनुरूप लाभ मिलने को लेकर कई स्तर पर समस्याएं सामने आ रही हैं।

संघ ने मांग की है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार की भूमि, मकान और परिसंपत्तियों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए तथा पात्रता के अनुसार मुआवजा और R&R लाभ सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही वर्ष 2011 की विस्थापन प्रक्रिया और वर्तमान प्रक्रिया में दिए जा रहे लाभों की स्थिति को भी स्पष्ट किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

नापी से लेकर पुनर्वास तक पारदर्शिता की मांग

मोरवा में चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के बीच प्रभावित परिवारों की मांग है कि मकानों की नापी, परिसंपत्तियों का मूल्यांकन, मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े सभी चरणों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि केवल जमीन और मकान का मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विस्थापन के बाद परिवारों के पुनर्वास और आजीविका से जुड़े अधिकारों को भी सुरक्षित किया जाना जरूरी है।

‘सिंगरौली पुनर्वास सेवा संघ’ ने कहा है कि संगठन एनसीएल प्रबंधन के समक्ष विस्थापितों की समस्याओं को उठाएगा और नियमों के अनुसार सभी पात्र परिवारों को उनका हक दिलाने का प्रयास करेगा। कार्यालय उद्घाटन कार्यक्रम में पूर्व विधायक राम लल्लू वैश्य, त्रिवेणी सिंह,प्रयाग लाल वैश्य, प्रवीण तिवारी, राजेश्वर वैश्य, भगवान दास वैश्य, राजेश गुप्ता, दयानंद वैश्य, दिनेश शाह,बाबूलाल प्रजापति,संजीव सिंह,सहित बड़ी संख्या में विस्थापित शामिल रहे

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