निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी, 21 सितंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई

जबलपुर/कटनी। कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई के दस्तावेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इस प्रकरण में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी के नाम से अलग-अलग गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। शुक्रवार देर शाम सामने आए दस्तावेजों पर 18 सितंबर 2026 की तारीख दर्ज है। वारंट में आरोपियों को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
दस्तावेजों में कुठला थाना और अपराध क्रमांक 738/2026 का उल्लेख है। मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस अब आरोपियों की तलाश और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
निलंबित सीएसपी से जुड़ा यह मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में भी विचाराधीन है। नेहा पच्चीसिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अगली सुनवाई से पहले सरकार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय है। इस दौरान याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी जाएगी या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा।
वहीं, पुलिस ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उनके विदेश जाने की आशंका को देखते हुए लुकआउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने अदालत में तर्क दिया कि नेहा पच्चीसिया को दुर्भावना के कारण मामले में फंसाया गया है। उनका कहना है कि दर्ज प्राथमिकी में उनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष भूमिका का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और सह-आरोपियों के साथ उनकी सीधी सांठगांठ भी नहीं दिखाई गई है।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने यह भी बताया कि नेहा पच्चीसिया दो छोटे बच्चों की एकल अभिभावक हैं और वर्तमान कार्रवाई के कारण उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कठिनाई हो रही है। उन्होंने अंतिम निर्णय तक किसी भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
इस मामले में कटनी की सत्र अदालत पहले ही अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर चुकी है। जांच और पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि नेहा पच्चीसिया और सह-आरोपी क्षितिज राज एक ही मकान में रहते थे। सत्र अदालत में दोनों द्वारा एक-दूसरे को पहचानने से इनकार करने की बात को अभियोजन ने संदेहास्पद परिस्थितियों में रखा था।
मामले में एक से दो करोड़ रुपए की कथित कीमत वाली जमीन को 18 से 20 लाख रुपए में सहयोगियों के नाम हस्तांतरित कराने का भी आरोप है। आरोप के मुताबिक कुठला थाना क्षेत्र में हत्या के एक मामले में आरोपी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चालान पेश करने में देरी की गई और बाद में उसके परिवार पर दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।
21 सितंबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी स्थिति और पुलिस कार्रवाई की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।













