पुरैल गांव में पंचायत भवन निर्माण का विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, 30 दिन में फैसला लें कलेक्टर- जस्टिस विशाल मिश्रा

सिंगरौली (सरई)।सरई तहसील के अंतर्गत ग्राम पुरैल में एक निजी भूमि पर पंचायत भवन (सामुदायिक भवन) निर्माण को लेकर चल रहा विवाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) पहुंच गया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने रिट पिटीशन (WP-5415/2025) का निराकरण करते हुए सिंगरौली कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 30 दिन के भीतर नियमानुसार निर्णय लें। हालांकि, उच्च न्यायालय ने फिलहाल मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। अब इस पूरे प्रकरण में सबकी नजरें प्रशासनिक फैसले पर टिक गई हैं।
पुश्तैनी जमीन पर बिना पटवारी प्रतिवेदन के निर्माण का आरोप
याचिकाकर्ता बृजेंद्र प्रसाद गुप्ता (पिता स्वर्गीय जगदीश गुप्ता, निवासी पुरैल) ने ग्राम पुरैल स्थित अपनी पुश्तैनी आराजी क्रमांक 1424 और 1425 पर बिना किसी सर्च रिपोर्ट और पटवारी प्रतिवेदन के हो रहे अवैध निर्माण पर कड़ी आपत्ति जताई है। पुलिस चौकी बरका (थाना सरई) में दी गई शिकायत के अनुसार, यह भूमि पूर्व में उनके परदादा परमेश्वर वानी के नाम पर दर्ज थी। राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटिवश यह जमीन ‘मध्य प्रदेश शासन’ के नाम दर्ज हो गई है, जिसके सुधार के लिए एसडीएम (SDM) न्यायालय में प्रकरण (क्रमांक 0028/अ-6(अ)/2026-2027) वर्तमान में विचाराधीन है।
हाईकोर्ट के ‘स्टे ऑर्डर’ की उड़ाई जा रही धज्जियां
याचिकाकर्ता का आरोप है कि गांव में कुछ दलाल और माफिया सक्रिय हैं, जो दूसरों के निजी पट्टे की जमीन को सरकारी बताकर उस पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2025 को उक्त आराजी पर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का स्टे ऑर्डर पारित किया था। आरोप है कि पंचायत में सरपंच के कथित साथी शिव संतोष चौबे और अंकित चौबे न्यायालय के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। इन लोगों द्वारा जबरन ट्रैक्टरों के माध्यम से निजी भूमि पर मिट्टी गिराकर खेती योग्य जमीन को समतल कर दिया गया और वहां पंचायत भवन व रोड निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया।
विरोध करने पर जान से मारने की धमकी, पुलिस से गुहार
शिकायतकर्ता के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 3 बजे जब पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर इस अवैध निर्माण को रोकने का प्रयास किया, तो शिव संतोष चौबे और अंकित चौबे गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने पर आमादा हो गए। स्थिति बिगड़ती देख पीड़ित के चचेरे भाई अशोक गुप्ता ने 112 नंबर डायल कर पुलिस को बुलाया, जिसकी भनक लगते ही आरोपी मौके से भाग खड़े हुए। याचिकाकर्ता बृजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने 17 जुलाई 2026 को पुलिस में लिखित शिकायत देकर मांग की है कि उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए अवैध निर्माण को तत्काल रुकवाया जाए, न्यायालय की अवमानना व शांति भंग करने वाले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और पीड़ित परिवार को जान-माल की सुरक्षा प्रदान की जाए।













