8.86 एकड़ जमीन मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय, अब शुरू होगी ट्रायल की कार्रवाई
विशेष पीएमएलए अदालत ने धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत तय किए आरोप, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए मुख्यमंत्री

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप तय कर दिए। आरोप तय होने के साथ ही मामले की सुनवाई अब साक्ष्य के चरण में आगे बढ़ेगी। अदालत में सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए और उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया।
इस मामले में सोरेन समेत कुल 17 आरोपी हैं। अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। सोरेन के खिलाफ आरोप तय होना इस मामले में चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया का अंतिम चरण था।
धारा 3 के तहत तय हुए आरोप
विशेष अदालत ने सोरेन के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत आरोप तय किए हैं। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार मामला रांची के बड़गाईं क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग पहलू से संबंधित है। जांच एजेंसी ने जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े आरोप लगाए हैं।
हालांकि, अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना दोष सिद्ध होना नहीं है। अब अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में गवाह और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। बचाव पक्ष को इन साक्ष्यों पर जिरह करने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए सोरेन
आरोप तय किए जाने के दौरान विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार ने आरोप पढ़कर सुनाए। सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने आरोप स्वीकार नहीं किए। उनकी ओर से कहा गया कि वह मामले में अपना बचाव करेंगे।
आरोप तय होने के बाद मामले को साक्ष्य के चरण में ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों की जांच की कार्रवाई 30 नवंबर से आगे बढ़ने की संभावना है।
हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं
विशेष अदालत में आरोप तय होने से पहले झारखंड हाईकोर्ट ने सोरेन की उस याचिका पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है। रिपोर्टों के अनुसार ईडी को जवाब दाखिल करने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय दिया गया है और मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) को चुनौती
सोरेन के बचाव पक्ष ने झारखंड हाईकोर्ट में पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है। बचाव पक्ष का कहना है कि इस प्रावधान के तहत विशेष पीएमएलए अदालत को अनुसूचित अपराध और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की सुनवाई एक साथ करने की व्यवस्था की गई है।
हाईकोर्ट ने इस चुनौती पर केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका पर 28 अक्टूबर को आगे सुनवाई प्रस्तावित है।
ईडी का आरोप क्या है
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार मामला रांची के बड़गाईं क्षेत्र की जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से संबंधित है। जांच एजेंसी ने जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए लेनदेन किए जाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और इन आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जनवरी 2024 में हुई थी गिरफ्तारी
इसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन को जनवरी 2024 में गिरफ्तार किया था। बाद में जून 2024 में झारखंड हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद वह फिर मुख्यमंत्री पद पर लौटे। मामले में इसके बाद भी न्यायिक प्रक्रिया जारी रही और सितंबर 2026 में आरोप तय करने की कार्रवाई को लेकर अदालतों में सुनवाई हुई।
अब गवाहों और साक्ष्यों की होगी जांच
आरोप तय होने के बाद मामले का अगला प्रमुख चरण साक्ष्य की रिकॉर्डिंग है। अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और दस्तावेजों को अदालत के सामने पेश करेगा। बचाव पक्ष को इन गवाहों से जिरह करने तथा अभियोजन के साक्ष्यों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा।
इस प्रकार 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े इस मामले में अब आरोप तय होने के बाद ट्रायल की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। वहीं, पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) की संवैधानिक वैधता को लेकर हाईकोर्ट में चल रही याचिका पर भी सुनवाई जारी रहेगी।












