शास्त्रार्थ की आड़ में धर्मगुरु स्थापित करने की कोशिश : स्वामी आदित्यवेश
श्रीराम, श्रीकृष्ण और महर्षि दयानंद का अपमान करने वालों पर भी साधा निशाना; चंडीगढ़ में पाखंड खंडन सम्मेलन आयोजित

मनोज शर्मा,चंडीगढ़। महान स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी वर्ष के अवसर पर ट्राईसिटी की आर्य समाज संस्थाओं के तत्वावधान में आर्य समाज सेक्टर-22ए में पाखंड खंडन सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता आचार्य राजेंद्र तथा आर्य समाज सेक्टर-9 के प्रधान धर्मबीर बत्रा ने संयुक्त रूप से की। मुख्य वक्ता सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी आदित्यवेश रहे।
स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि कुछ लोग श्रीराम, श्रीकृष्ण और महर्षि दयानंद जैसे महापुरुषों का अपमान करने वाले देश और धर्म विरोधी विचारों को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में एक व्यक्ति शास्त्रार्थ की आड़ में स्वयं को धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्य समाज पाखंड, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष जारी रखेगा।
आचार्य राजेंद्र ने कहा कि सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में आर्य समाज ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। स्वामी नित्यानंद ने कहा कि पाखंड समाज के माथे पर कलंक है और इसे तर्क, वैचारिक जागरूकता तथा जनचेतना के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
स्वामी दिव्यानंद ने स्वतंत्रता आंदोलन में आर्य समाज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में आर्य समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ब्रह्मचारी अग्निदेव ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रभक्ति के प्रसार ने स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक आधार प्रदान किया।
आचार्य अर्जुनदेव ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण में आर्य समाज के भजनोपदेशकों और पुरोहित वर्ग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आर्य केंद्रीय सभा, करनाल के प्रधान प्रो. आनंद सिंह ने युवाओं में संस्कार निर्माण के अभियान को और गति देने की बात कही।
केंद्रीय आर्य सभा के मीडिया सलाहकार डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश का गंभीरता से अध्ययन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। प्रिंसिपल आर.सी. जीवन ने कहा कि पाखंड और अंधविश्वास समाज की प्रगति में बाधक हैं। सनातन वैदिक परंपरा के मूल मानवीय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
आर्य समाज सेक्टर-9, पंचकूला के प्रधान धर्मबीर बत्रा ने कहा कि पाखंड खंडन सनातन धर्म सम्मेलन का उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वास और रूढ़ियों के प्रति जागरूकता पैदा करना है। वैदिक सिद्धांत सत्य, तर्क, मानव कल्याण और विवेकपूर्ण जीवन का संदेश देते हैं।
सुभाष फौजी ने रामपाल के संबंध में अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी रखते हुए कहा कि उनके द्वारा खड़ा किया गया तंत्र कथित रूप से झूठ की बुनियाद पर आधारित है। सौम्या माथुर ने सोशल मीडिया पर रामपाल समर्थकों द्वारा महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित मामलों में कार्रवाई की मांग की।
सम्मेलन में दिलबाग आर्य, प्रिंसिपल आर.सी. जीवन, धर्मबीर बत्रा, राजेश्वर प्रसाद, विजय आर्य, ईश्वर आर्य, सुनीता, उर्मिल अरोड़ा, अशोक डागर, अशोक आर्य, अजयपाल आर्य, निशांत आर्य, मनीराम, सत्यवीर, आदर्श आर्य, सुनील आर्य, अंकित शास्त्री, यशवीर शास्त्री और सुदेश शास्त्री सहित अनेक आर्य समाज प्रतिनिधियों ने विचार रखे।













