राजस्थान में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत, क्रेशर प्लांट विवाद में खूनी संघर्ष
70 से 80 लोगों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला करने का आरोप, पत्नी ने पुलिस-प्रशासन पर उठाए सवाल

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में क्रेशर प्लांट को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद रविवार शाम हिंसक संघर्ष में बदल गया। बयाना के पूर्व विधायक और भाजपा नेता अतर सिंह भड़ाना गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया, जहां रात करीब 11:30 बजे उनकी मौत हो गई। घटना में उनके सहयोगी गगन शर्मा भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मामले के बाद क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना वैर थाना क्षेत्र के भौंड़ा गांव स्थित क्रेशर प्लांट की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:30 बजे अतर सिंह भड़ाना प्लांट पर मौजूद थे। करीब एक साल से बंद क्रेशर को दोबारा शुरू कराने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई।
आरोप है कि 70 से 80 लोगों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। संघर्ष में अतर सिंह भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा घायल हो गए। दोनों को पहले वैर उप जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर भड़ाना को जयपुर और गगन शर्मा को भरतपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान भड़ाना ने दम तोड़ दिया।
पत्नी ने पुलिस-प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप
पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश ने घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि क्रेशर की लीज का कनेक्शन काट दिया गया था और पानी का पंप भी खराब कर दिया गया था। लीज पर जाने वाले लोगों को भी वहां से भगाया जा रहा था। कमलेश के मुताबिक, इन घटनाओं की जानकारी पुलिस और प्रशासन को लगातार दी जा रही थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने दावा किया कि रविवार शाम 6:30 से 7 बजे के बीच 70 से 80 लोगों ने उनके पति और अन्य लोगों पर हमला किया। पत्नी ने भड़ाना को गोली लगने की बात भी कही है। हालांकि, वैर अस्पताल के चिकित्सकों ने शुरुआती जांच में गोली लगने की आशंका से इनकार किया था। पुलिस फायरिंग के आरोपों की भी जांच कर रही है।
चारागाह भूमि और रास्ते को लेकर पुराना विवाद
पुलिस के अनुसार, क्रेशर प्लांट को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह ने बताया कि करीब चार साल पहले भी क्रेशर संचालक और ग्रामीणों के बीच झगड़ा हुआ था। ग्रामीणों का आरोप था कि क्रेशर के लिए चारागाह भूमि पर अतिक्रमण किया गया और अवैध खनन किया जा रहा था। क्रेशर की लीज तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर भी विवाद बना हुआ था।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले करीब दो वर्षों से इस मुद्दे पर समय-समय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। पिछले 10 से 15 दिनों से भी शांतिपूर्ण धरना जारी था। ग्रामीणों के मुताबिक, रविवार को भड़ाना पक्ष के 40 से 50 लोग वहां पहुंचे और कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटा दिया। इसके बाद विवाद बढ़ा और दोनों पक्षों के बीच लाठी-पत्थर चलने लगे।
पुलिस जुटा रही घटनाक्रम की जानकारी
थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह के अनुसार, घटना से पहले किसी भी पक्ष ने पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया था। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। संघर्ष की शुरुआत किसने की, फायरिंग हुई या नहीं और कितने लोग घायल हुए, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। घटना के समय क्रेशर प्लांट पर करीब 20 से 25 कर्मचारियों के मौजूद होने की जानकारी भी सामने आई है।
फिलहाल, घटना को लेकर दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं। विवाद की वास्तविक वजह और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।













