
पोल खोल पोस्ट / सीजेआई के सामने जूता उछालने की घटना पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा करते हुए कहा कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि उच्च जाति के कुछ लोग इस बात को स्वीकार नहीं कर सके कि दलित समुदाय से आने वाले न्यायमूर्ति गवई इतने ऊंचे पद पर पहुंच गए हैं।
बता दें कि सोमवार को राकेश किशोर नाम के 72 वर्षीय वकील ने कोर्ट में सीजेआई गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, तब हरकत में आए सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया था। उस दौरान सीजेआई ने किशोर को जाने देने के लिए कहा था। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी परिसर में लंबी पूछताछ के बाद वकील को छोड़ दिया था।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। प्रमुख दलित नेता और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह घटना निंदनीय है।
मंत्री ने कहा, प्रधान न्यायाधीश पर हमले का प्रयास पहली बार हुआ है। भूषण गवई दलित समुदाय से हैं और उन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर यह पद हासिल किया है। उन्होंने कहा कि उच्च जाति समुदाय के कुछ सदस्य इस तथ्य को पचा नहीं पा रहे हैं।
आठवले ने कहा, मैं मांग करता हूं कि आरोपी पर एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि न्यायमूर्ति गवई पर इसलिए हमले का प्रयास किया गया क्योंकि वह दलित हैं। इससे पहले किसी भी प्रधान न्यायाधीश पर हमला नहीं हुआ था।
गवई ने गुरुवार को कहा कि वह और जस्टिस के विनोद चंद्रन उस समय स्तब्ध रह गए थे जब छह अक्टूबर को एक वकील ने उन पर जूता फेंकने का प्रयास किया था। प्रधान न्यायाधीश ने जूता फेंकने के प्रयास की घटना पर कहा, सोमवार को जो कुछ हुआ उससे मैं और मेरे विद्वान साथी (न्यायमूर्ति चंद्रन) बहुत स्तब्ध हैं;
हमारे लिए यह एक भुलाया जा चुका अध्याय है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने किशोर की सदस्यता खत्म कर दी है। इसके अलावा वकील के सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है। जूता फेंकने के मामले में आरोपी का कहना है कि वह भगवान विष्णु की मूर्ति को लेकर सीजेआई की तरफ से की गई टिप्पणी से आहत है।













