दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती: सीमाओं पर बाहरी गाड़ियों की नो एंट्री, संयुक्त टीमें और वॉट्सऐप ग्रुप से होगी निगरानी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार चिंताजनक बनी हुई है और आने वाले दिनों में पराली के धुएं की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पड़ोसी राज्यों की पुलिस व संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर सख्त कार्ययोजना तैयार की है।
बॉर्डर से ही लौटाई जाएंगी नियम विरुद्ध बसें:
स्पेशल सीपी (ट्रैफिक) अजय चौधरी के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाली अंतरराज्यीय व अंतरशहरी बसों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही बॉर्डर से डायवर्ट कर दिया जाएगा। राजधानी में केवल इलेक्ट्रिक (EV), सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-अनुमति प्राप्त वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध सख्ती से लागू रहेगा। सीमाओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश वाले सूचना बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं।
संयुक्त टीमें और वाहनों की सघन जांच:
प्रदूषण नियंत्रण व ‘ग्रेप’ (GRAP) नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सीमाओं पर विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। ये टीमें नो-एंट्री के समय का पालन, ओवरलोडिंग, रूट उल्लंघन और वाहनों के वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) की सघन जांच करेंगी। साथ ही निर्माण व तोड़फोड़ (C&D) सामग्री को बिना ढके ले जाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
एजेंसियों के समन्वय के लिए वॉट्सऐप ग्रुप:
सभी संबंधित विभागों और अंतरराज्यीय सुरक्षा बलों के बीच त्वरित संवाद व रियल-टाइम निगरानी के लिए एक विशेष वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। इसके जरिए नियमों के उल्लंघन पर तुरंत सूचना साझा कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उधर, हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में यह चेतावनी भी दी गई है कि प्रतिकूल मौसम व तापमान के चलते प्रदूषक तत्व लगातार पांच दिनों तक वातावरण में एक ही जगह जमे रह सकते हैं, जिससे सख्ती बरतना अनिवार्य हो गया है।













