सिंगरौली में धूमधाम से मनाई गई महाराजा अजमीढ़ देव जी की जयंती, समाज की एकता और संगठन की मजबूती पर जोर
गनियारी के शिवा बैंक्वेट हॉल में जुटे करीब 150 महिला-पुरुष और बच्चे, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को समाज के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का लिया संकल्प

सिंगरौली। सिंगरौली स्वर्णकार समाज संघ (रजि.) के तत्वावधान में सोमवार, 26 अक्टूबर को स्वर्णकार समाज के आराध्य एवं कुल गौरव महाराजा अजमीढ़ देव जी की जयंती श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई गई। गनियारी स्थित शिवा बैंक्वेट हॉल में आयोजित समारोह में समाज के लगभग 150 महिला-पुरुषों और बच्चों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में समाज की एकता, संगठन की मजबूती, शिक्षा के महत्व और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
समारोह की अध्यक्षता संघ के संरक्षक गणेश प्रसाद सोनी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में ऊर्जांचल सोनार समाज के अध्यक्ष कामतानाथ सोनी उपस्थित रहे। मंच पर जिला अध्यक्ष सत्यनारायण सोनी (संजय), वरिष्ठ मार्गदर्शक एवं पूर्व शिक्षक कैलाश सोनी, महिला समाज की संरक्षक रीता सोनी और राजेश सोनी सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेन्द्र सोनी ने किया।

दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक आरती से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद महाराजा अजमीढ़ देव जी का सामूहिक पूजन और आरती की गई। उपस्थित अतिथियों एवं पदाधिकारियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। समारोह में वक्ताओं ने महाराजा अजमीढ़ देव जी के आदर्शों को याद करते हुए समाज के लोगों से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल उत्सव तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को जीवन में अपनाना भी जरूरी है। ऐसे आयोजन समाज के लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ आपसी मेलजोल और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
एकता, शिक्षा और संगठन से होगा समाज का विकास
समारोह के दौरान समाज की प्रगति के लिए एकजुटता और मजबूत संगठन की आवश्यकता पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज के सर्वांगीण विकास में शिक्षा, आपसी सहयोग और संगठित प्रयासों की अहम भूमिका होती है। समाज के लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए और सामाजिक उत्थान के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराजा अजमीढ़ देव जी की जयंती समाज को अपनी गौरवशाली विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को याद करने का अवसर देती है। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने आराध्य, समाज के इतिहास और परंपराओं के बारे में जानने का अवसर मिलता है। वक्ताओं ने सामाजिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने और संगठन को अधिक मजबूत बनाने की जरूरत भी बताई।
करीब 150 लोगों ने लिया सहभागिता का संकल्प
जयंती समारोह में करीब 150 महिला-पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने महाराजा अजमीढ़ देव जी को नमन करते हुए समाज की एकता बनाए रखने, संगठन का विस्तार करने और सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजन की सराहना की गई। समाज के लोगों ने भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया, ताकि सामाजिक एकजुटता बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों तक समाज की परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाया जा सके।













