टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन की वादाखिलाफी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
पिड़रवाह मेन गेट पर अनवरत धरना शुरू

सिंगरौली:जिले में संचालित टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन परियोजना के खिलाफ विस्थापितों और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा है। कंपनी प्रबंधन द्वारा विस्थापन के समय किए गए वादों से मुकरने के विरोध में मंगलवार से पिड़रवाह स्थित कंपनी के मुख्य गेट के सामने ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। धरने का नेतृत्व तेन्दुहा ग्राम पंचायत के सरपंच छोटे सिंह मरावी और विस्थापित नेता बृजेश तिवारी कर रहे हैं।
जमीन ली, लेकिन नहीं दिया बुनियादी हक
धरना स्थल पर उपस्थित ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान कंपनी प्रबंधन ने सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा और स्कूल जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो समुचित मुआवजा मिला, न पुनर्वास की व्यवस्था हुई और न ही स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया।तेन्दुहा सरपंच छोटे सिंह मरावी ने कहा कि कंपनी ने किसानों से उनकी उपजाऊ जमीनें तो छीन लीं, लेकिन उनका वाजिब हक देने से मुकर गई है। वहीं विस्थापित नेता बृजेश तिवारी ने दो-टूक कहा कि यह उनके अस्तित्व और हक की आर-पार की लड़ाई है, जब तक सभी मांगों का निराकरण नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर कंपनी को पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने हेतु बाध्य करने की मांग की है।
धरने में ये प्रमुख ग्रामीण व विस्थापित रहे शामिल
धरना स्थल पर तेन्दुहा सरपंच छोटे सिंह मरावी, बृजेश तिवारी, बाबू चन्द पटेल, बुद्धसेन पनिका, बलदेव साकेत, लखपती विश्वकर्मा, ओम प्रकाश सिंह, प्रदीप पटेल, प्राणमती नाई, रेशकुमारी सिंह, बिरहुलीया उर्फ रजवंती, बाबू नन्दन पटेल, इन्द्रपाल सिंह, संतोष सिंह, मनोज सिंह, झुपुर सिंह, जनकधारी सिंह, अभय लाल पाल, राम औतार पनिका, अनुप सिंह, बाबूलाल सिंह, मुकेश बियार, उदयचन्द पटेल, छोटे पटेल तथा राजकुमार साकेत सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष विस्थापित उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि ग्रामीणों के आंदोलन को लेकर कंपनी प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।













