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पंचायतों में टैक्स वसूली की तैयारी, जिला पंचायत सीईओ ने जारी किए निर्देश; ग्रामीणों का सवाल—बदले में क्या मिलेंगी सुविधाएं?

बैढ़न, देवसर और चितरंगी की ग्राम पंचायतों में अनिवार्य व वैकल्पिक कर अधिरोपित करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल

सिंगरौली। जिले की ग्राम पंचायतों में अब विभिन्न करों और शुल्कों की वसूली को लेकर प्रशासनिक कवायद तेज होने जा रही है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संघ प्रिय ने बैढ़न, देवसर और चितरंगी विकासखंड की ग्राम पंचायतों में अनिवार्य एवं वैकल्पिक कर अधिरोपित करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य पंचायतों की स्वयं की आय बढ़ाना बताया गया है। हालांकि, आदेश सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में यह सवाल उठने लगा है कि करों की वसूली के साथ आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।

जिला पंचायत के आदेश क्रमांक 2889/जि.पं./RGSA/2026 में मध्य प्रदेश शासन के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय यानी ओएसआर बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 77 एवं 77-क तथा संबंधित नियमों का उल्लेख किया गया है। निर्देशों के तहत तीनों जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों को कर अधिरोपण की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

भवन निर्माण से लेकर पानी और प्रकाश कर तक की व्यवस्था
जारी आदेश के अनुसार, पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न करों और शुल्कों पर अमल की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें भवन निर्माण शुल्क, प्रकाश कर, वृत्तिकर, निजी शौचालय पर कर, संपत्तिकर, बाजार फीस, पशु पंजीकरण शुल्क और जल प्रभार सहित अन्य वैकल्पिक कर शामिल हैं।इस व्यवस्था के तहत पंचायतों को अपने क्षेत्र में लागू प्रावधानों और संबंधित नियमों के अनुसार कर अधिरोपण की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। हालांकि, अलग-अलग करों की दरें, छूट की पात्रता और वसूली की वास्तविक स्थिति संबंधित नियमों तथा पंचायत स्तर पर लागू व्यवस्था के आधार पर स्पष्ट होगी।

टैक्स के साथ सुविधाओं की जवाबदेही भी जरूरी
कर वसूली की तैयारी के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके बदले उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्रों में पेयजल की नियमित उपलब्धता, स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव, नालियों की सफाई, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।
कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि कर वसूली की प्रक्रिया के साथ इन समस्याओं के समाधान के लिए भी स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए। उनका सवाल है कि जब नागरिकों से अलग-अलग मदों में राशि ली जाएगी, तो पंचायतें सुविधाओं की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाएंगी।

पंचायतों की आय बढ़ने से विकास को मिल सकती है गति
पंचायतों की स्वयं की आय बढ़ने से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों में वृद्धि हो सकती है। इससे नियमों के अनुरूप स्थानीय जरूरतों पर खर्च करने की क्षमता मजबूत होने की संभावना है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी हो, लोगों को लागू दरों और नियमों की जानकारी दी जाए तथा प्राप्त राशि के उपयोग का हिसाब भी सार्वजनिक किया जाए।
फिलहाल, जिला पंचायत के निर्देशों के बाद अब ग्राम पंचायत स्तर पर कर अधिरोपण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन करों से संबंधित नियमों और दरों को स्पष्ट करने के साथ यह भी बताए कि बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए क्या व्यवस्था होगी। कर वसूली के साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर सेवाओं का भरोसा कायम करना पंचायत प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।

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