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सड़क नहीं, कीचड़ में फंसी एंबुलेंस तो बुजुर्ग को खाट पर लादकर ले गए परिजन, हरनाडोल की बदहाल व्यवस्था का वीडियो वायरल

75 वर्षीय जसपाल प्रजापति को सांस लेने में हुई तकलीफ, डेढ़ किलोमीटर बाद सड़क खत्म; बारिश में ग्रामीणों के लिए आवागमन बना मुसीबत

सिंगरौली। विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जनपद पंचायत देवसर के महरेल गांव अंतर्गत हरनाडोल टोले की एक तस्वीर ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत सामने ला दी है। यहां पक्की सड़क नहीं होने के कारण गंभीर रूप से बीमार 75 वर्षीय बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को खाट का सहारा लेना पड़ा। मरीज को लेने पहुंची एंबुलेंस रास्ते में कीचड़ के भीतर फंस गई। इसके बाद परिजनों ने बुजुर्ग को खाट पर लिटाया और कंधों पर उठाकर पगडंडी तथा खेतों के रास्ते मुख्य मार्ग तक पहुंचाया। घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित हरनाडोल टोले में शुक्रवार को 75 वर्षीय जसपाल प्रजापति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही थी। परिजनों ने बिना देर किए एंबुलेंस को सूचना दी, ताकि बुजुर्ग को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। लेकिन गांव तक पहुंचने वाला रास्ता ही उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया। एंबुलेंस मरीज के घर तक पहुंचने से पहले ही कच्चे रास्ते के दलदल और कीचड़ में धंस गई। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने वाहन को बाहर निकाला, लेकिन मरीज को वहां से एंबुलेंस तक पहुंचाना भी आसान नहीं था।

डेढ़ किलोमीटर सड़क के बाद रास्ता खत्म, मरीज को खाट पर उठाकर ले गए परिजन
स्थानीय जानकारी के अनुसार, आदिवासी बहुल महरेल गांव के भाटी गांव से हरनाडोल मोहल्ले तक करीब डेढ़ किलोमीटर तक सड़क बनी हुई है, लेकिन इसके आगे का रास्ता आज भी कच्चा और बदहाल है। बारिश के कारण रास्ते में जगह-जगह कीचड़ और दलदल की स्थिति बन गई है। ऐसे में चारपहिया वाहन का पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

शुक्रवार को जब जसपाल प्रजापति की हालत बिगड़ी तो परिजनों ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की थी। लेकिन एंबुलेंस के रास्ते में फंस जाने से उनकी मुश्किल बढ़ गई। अंततः परिजनों ने बुजुर्ग को खाट पर लिटाया और कई लोगों ने मिलकर उसे कंधों पर उठाया। पगडंडी और खेतों के बीच से होते हुए उन्हें मुख्य सड़क तक ले जाया गया। इस दौरान परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों की बदहाली चर्चा का विषय बन गई है।

बारिश में गांव का संपर्क प्रभावित, बच्चों और बुजुर्गों को भी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि हरनाडोल टोले तक पक्की सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने कई बार समस्या रखी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बरसात के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य दिनों में भी इस रास्ते से आवागमन आसान नहीं है, जबकि बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। सबसे बड़ी चिंता आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है। यदि किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाए तो एंबुलेंस का घर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीज को मुख्य मार्ग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी परिजनों और ग्रामीणों पर आ जाती है।

तहसीलदार बोले—मामले की जानकारी लेकर निकालेंगे समाधान
मामले को लेकर प्रभारी तहसीलदार धर्मप्रकाश मिश्रा ने बताया कि हरनाडोल में सड़क की समस्या और मरीज को खाट पर ले जाने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है। पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि गांव तक आवागमन सुगम बनाने के लिए सड़क की समस्या का समुचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि हरनाडोल के ग्रामीणों को पक्की सड़क के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? एक बुजुर्ग मरीज को खाट पर उठाकर ले जाने की घटना ने यह साफ कर दिया है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव किस तरह आपातकालीन स्थिति में लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के लिए ठोस पहल का इंतजार है।

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