टीएचडीसी अमिलिया और बंधा कोल ब्लॉक कंपनियों के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश, वाहनों को रोककर किया चक्काजाम

सिंगरौली। जिले में संचालित टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। गहिलरा ग्राम पंचायत के सरपंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कंपनी के वाहनों को रोक दिया और चक्काजाम कर विरोध जताया। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनियां उनके गांवों के आसपास कोयला खनन कर रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार देने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में अनदेखी की जा रही है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव कंपनी क्षेत्र के आसपास स्थित हैं और आसपास के जंगलों पर उनकी आजीविका निर्भर रही है। तेंदूपत्ता, महुआ और डोरी जैसे वन उपज से ग्रामीणों के परिवारों का भरण-पोषण होता है। अब क्षेत्र में कोयला खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
विस्थापितों के नेता जनक लाल सोनी ने कहा कि कंपनी के आसपास बसे गांवों के लोगों को रोजगार का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, ग्रामीणों ने सड़क, नाली, बिजली और पेयजल की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र की सड़कें खराब हो चुकी हैं, नालियों की स्थिति ठीक नहीं है, बिजली की आपूर्ति अनियमित बनी हुई है और लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन और बंधा कोल ब्लॉक कंपनी प्रबंधन के सामने कई बार मांग रखी गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लगातार उपेक्षा से नाराज होकर उन्हें सड़क पर उतरकर वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा।विरोध की सूचना मिलने पर कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक कंपनी के वाहनों को क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
गहिलरा सरपंच ने भी कंपनी पर केवल खनन गतिविधियों पर ध्यान देने और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समस्याओं का जल्द निराकरण कराने की मांग की है।













