एनटीपीसी विंध्याचल के राखड़ परिवहन से उड़ रही धूल, प्रदूषण से परेशान स्थानीय रहवासी

सिंगरौली। एनटीपीसी विंध्याचल में राखड़ (फ्लाई ऐश) के परिवहन के दौरान उड़ने वाली धूल स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती जा रही है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। समस्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है, जिससे राहगीरों, दुपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, राखड़ परिवहन मार्गों पर पतली पाइपों के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जाता है, लेकिन बड़े पैमाने पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। आरोप है कि राखड़ ले जाने वाले कई भारी वाहन ओवरलोड होकर गुजरते हैं। वहीं, वाहनों को ठीक से त्रिपाल से नहीं ढके जाने के कारण रास्ते में राखड़ गिरती रहती है। सड़क पर जमा राखड़ हवा चलने पर धूल के गुबार में बदल जाती है और आसपास के इलाकों में फैल जाती है।
इससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि लंबे समय तक इस तरह के प्रदूषण के संपर्क में रहने से श्वसन तंत्र और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि एनटीपीसी के राख उपयोगिता विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नियमित निगरानी प्रभावी नजर नहीं आ रही है। लोगों ने राखड़ परिवहन करने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग पर रोक लगाने, उन्हें अनिवार्य रूप से त्रिपाल से ढकने, व्हील वॉशिंग सिस्टम स्थापित करने तथा तैलगवां, कोटा बस्ती और ज्वालामुखी मार्ग पर नियमित जल छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।स्थानीय निवासियों ने संबंधित विभागों से मौके पर निरीक्षण कर प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक परिवहन व्यवस्था और सड़कों की नियमित सफाई पर सख्ती नहीं होगी, तब तक क्षेत्रवासियों को धूल और प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है।













