सीवरेज के बाद गैस पाइपलाइन की खुदाई से बदहाल हुईं सिंगरौली की सड़कें, जगह-जगह गड्ढों से हादसों का खतरा

सिंगरौली। शहर में विकास कार्यों के नाम पर सड़कों की लगातार हो रही खुदाई अब आम नागरिकों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनती जा रही है। पहले सीवरेज परियोजना के दौरान सड़कों की दुर्दशा हुई और अब गैस पाइपलाइन बिछाने के नाम पर जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। कई स्थानों पर खुदाई के बाद सड़क की समुचित मरम्मत और समतलीकरण नहीं होने से रास्ते उबड़-खाबड़ हो गए हैं। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम सिंगरौली क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम कराया जा रहा है। पाइपलाइन डालने के लिए सड़कों को आर-पार खोदा जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर शिकायतें हैं कि कई स्थानों पर काम पूरा होने के बाद भी खुदाई वाले हिस्सों को व्यवस्थित तरीके से ठीक नहीं किया जा रहा। गड्ढों को भरने और सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल करने में कथित लापरवाही के कारण वाहन चालकों को अचानक असमतल रास्तों और गड्ढों का सामना करना पड़ रहा है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
सीवरेज के बाद गैस पाइपलाइन की खुदाई ने बढ़ाई परेशानी
शहरवासियों का कहना है कि एक परियोजना के तहत सड़कों की मरम्मत और बहाली का काम पूरा भी नहीं हो पाता कि दूसरी परियोजना के लिए फिर खुदाई शुरू हो जाती है। सीवरेज कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की समस्या अभी पूरी तरह दूर नहीं हुई है। इसी बीच गैस पाइपलाइन की खुदाई ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इसका सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहन चालकों, बुजुर्गों और पैदल राहगीरों पर पड़ रहा है। दिन के समय गड्ढे दिखाई देने के कारण लोग किसी तरह बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में बिना संकेतक और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के खुले या अधूरे भरे गड्ढे गंभीर हादसे की वजह बन सकते हैं।
नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
सड़कों की खुदाई और उसके बाद मरम्मत की जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जब निगम क्षेत्र में बड़े स्तर पर सड़कें खोदने की अनुमति दी जा रही है, तो संबंधित एजेंसी से काम पूरा होने के बाद सड़क की बहाली सुनिश्चित क्यों नहीं कराई जा रही है? क्या अनुमति देते समय सड़क की मरम्मत और सुरक्षा से जुड़ी शर्तें तय नहीं की गई थीं? यदि शर्तें निर्धारित हैं, तो उनका पालन कराने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
निगम प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि गैस पाइपलाइन बिछाने वाली एजेंसी के काम का निरीक्षण कौन कर रहा है और अब तक कितने स्थानों पर खुदाई के बाद सड़क की मरम्मत कराई गई है। यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है?
भुगतान संबंधी विवाद का खामियाजा जनता क्यों भुगते?
निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के भुगतान में देरी को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं सामने आती रही हैं। यदि संबंधित कंपनी और नगर निगम के बीच भुगतान या किसी अन्य विषय को लेकर विवाद है, तो उसका निराकरण प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए। लेकिन किसी भी तरह के विवाद का बोझ आम नागरिकों पर डालना उचित नहीं है।
किसी परियोजना की जिम्मेदारी केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं हो सकती। खुदाई के बाद सड़क को सुरक्षित और उपयोग योग्य स्थिति में बहाल करना भी कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब तक सड़क की मरम्मत नहीं होती, तब तक संबंधित एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बनी रहती है।
हादसा होने पर किसकी तय होगी जवाबदेही?
शहर की सड़कों पर बने गड्ढों और अधूरे मरम्मत कार्यों के बीच सबसे बड़ा सवाल नागरिकों की सुरक्षा का है। यदि किसी दोपहिया वाहन चालक की जान जाती है या कोई राहगीर गंभीर रूप से घायल होता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? नगर निगम आयुक्त, महापौर, निगम अध्यक्ष, संबंधित अधिकारी या गैस पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनी और ठेकेदार की? जिम्मेदारी तय करने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।
नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को प्रभावित मार्गों का तत्काल निरीक्षण कराना चाहिए। खुले और अधूरे गड्ढों के आसपास चेतावनी संकेतक लगाए जाएं, खुदाई वाले हिस्सों को सुरक्षित किया जाए और सड़क की गुणवत्ता के साथ मरम्मत सुनिश्चित कराई जाए। लापरवाही सामने आने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
शहरवासियों की मांग है कि विकास कार्यों के नाम पर सड़कों की खुदाई के साथ उनकी बहाली और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। सिंगरौली की जनता को विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो रोजमर्रा के आवागमन को जोखिम भरा बना दे। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह इस समस्या पर कब ठोस कदम उठाता है।











