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अर्जुन सिंह ने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा और सामाजिक समरसता का माध्यम बनाया : डॉ. अंजू सिंह बघेल

पूर्व मुख्यमंत्री की जन्मतिथि पर किया स्मरण, कहा- लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा उनका जीवन

जबलपुर। कांग्रेस नेत्री डॉ. अंजू सिंह बघेल ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह को उनकी जन्मतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद करते हुए कहा कि दाऊ साहब का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में गरिमा, वैचारिक प्रतिबद्धता, सामाजिक समरसता और जनसेवा का विशिष्ट उदाहरण है। उन्होंने राजनीति को कभी केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और अवसर पहुंचाने का जरिया बनाया।

डॉ. बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह का राजनीतिक जीवन पद और प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं था। उन्होंने प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी अलग पहचान बनाई और लोकतांत्रिक मूल्यों, जनहित तथा कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए। उनकी राजनीतिक दृष्टि व्यापक थी और सार्वजनिक जीवन में मानवीय संवेदनाओं को विशेष महत्व देते थे।

विधानसभा में दिया संदेश आज भी प्रासंगिक

डॉ. बघेल ने 5 सितंबर 1957 को मध्य प्रदेश विधानसभा में कुंवर अर्जुन सिंह द्वारा दिए गए वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर उनके विचार आज भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक इमारत की नींव मजबूत रखने और ऐसा कोई काम नहीं करने की बात कही थी, जिससे पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ जाए। डॉ. बघेल के अनुसार, यह विचार लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, जवाबदेही और संवैधानिक मर्यादा का महत्व समझाता है।

कबीर के विचारों से प्रभावित थी सामाजिक दृष्टि

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह को राजनीति का कबीर कहा जाना उनके व्यक्तित्व की व्यापकता को दर्शाता है। कबीर की विचारधारा की तरह दाऊ साहब भी जाति, पंथ और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखने की सोच रखते थे। उनके विचारों में एकता, सद्भाव और सामाजिक समरसता का विशेष स्थान था। वे मानते थे कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिले।

डॉ. बघेल ने कहा कि दाऊ साहब ने किसानों, गरीबों, आदिवासियों, हरिजन और पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण पर जोर दिया। उनका मानना था कि शासन की सार्थकता तभी है, जब योजनाओं और नीतियों का लाभ समाज के कमजोर तथा वंचित तबकों तक पहुंचे। उनकी सहजता, सरलता, दृढ़ता और वैचारिक स्पष्टता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

डॉ. अंजू सिंह बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह लोकतांत्रिक परंपराओं और सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं के प्रति प्रतिबद्ध थे। उनकी पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि जनता के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से बनी। आज सामाजिक सौहार्द, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक मर्यादाओं को मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे समय में दाऊ साहब के विचारों को याद करना और उन्हें व्यवहार में उतारना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे उनके जन्मदिवस पर केवल पुष्पांजलि तक सीमित न रहें, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, एकता और सद्भाव के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। डॉ. बघेल ने कहा कि कुंवर अर्जुन सिंह का जीवन संघर्ष, निर्माण और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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