बड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़मध्य प्रदेशसिंगरौली

टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन के गेट पर ग्रामीणों का धरना 10वें दिन भी जारी, तहसीलदार ने की चर्चा

तेंदुहा सरपंच छोटे सिंह मरावी और विस्थापित नेता विश्वास तिवारी के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों ग्रामीण, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग पर अड़े

 

सिंगरौली। जिले में संचालित टीएचडीसी अमिलिया कोल माइन और बंधा कोल ब्लॉक कंपनियों के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पीड़रवाह स्थित टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के मुख्य गेट पर ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन 10वें दिन भी जारी रहा। इसी बीच आज बरगवां तहसीलदार दीपेंद्र तिवारी कंपनी के मुख्य गेट पर पहुंचे और सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में उनकी समस्याओं और मांगों पर चर्चा की।

तेंदुहा ग्राम पंचायत के सरपंच छोटे सिंह मरावी और विस्थापित नेता विश्वास तिवारी के नेतृत्व में ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने कंपनी के वाहनों को रोककर विरोध जताया। चर्चा में राजेंद्र पटेल, महेंद्र पटेल, चंद्रदेव पटेल, कन्हैया लाल पटेल, बाबू नंदन पटेल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनियां गांवों के आसपास कोयला खनन गतिविधियां संचालित कर रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों से उनकी आजीविका जुड़ी रही है। तेंदूपत्ता, महुआ और डोरी जैसी वन उपज से परिवारों का भरण-पोषण होता था, लेकिन खनन गतिविधियां बढ़ने के बावजूद स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों ने सड़क, नाली, बिजली और पेयजल जैसी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र की सड़कें खराब हैं, नालियों की स्थिति ठीक नहीं है, बिजली की आपूर्ति अनियमित है और पेयजल संकट से लोगों को परेशानी हो रही है। विस्थापितों के नेता जनक लाल सोनी ने भी कंपनी के आसपास बसे गांवों के लोगों को रोजगार के अवसर नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।

ग्रामीणों के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर कंपनी प्रबंधन के समक्ष कई बार मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं हुआ। इसी नाराजगी के चलते उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर समस्याओं का शीघ्र निराकरण कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जब तक सड़क, बिजली, पेयजल और रोजगार से जुड़ी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और कंपनी के वाहनों का आवागमन बाधित किया जा सकता है।

तहसीलदार दीपेंद्र तिवारी ने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। अब देखना होगा कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की पहल से लंबे समय से जारी इस गतिरोध का कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।

Author

Related Articles

Back to top button